
भोपाल: मध्य प्रदेश की स्पेशल टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने वन्यजीव अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। कुख्यात अंतरराष्ट्रीय बाघ शिकारी आदीन सिंह उर्फ़ कल्ला बावरिया और उसके दो साथियों को चार साल के कठोर कारावास और 25,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। यह फैसला 11 फरवरी को नर्मदापुरम के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने सुनाया।
विदिशा से हुई थी गिरफ्तारी
कल्ला बावरिया को 18 अगस्त 2023 को विदिशा जिले के ग्यारसपुर से गिरफ्तार किया गया था। यह गिरफ्तारी भारत सरकार के वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की विशेष जानकारी के आधार पर हुई। इसके बाद, STSF ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर उसके आपराधिक नेटवर्क का खुलासा किया।
जांच में यह भी पता चला कि 2012 में नेपाल में उसके खिलाफ बाघ के शिकार और उसके अंगों की तस्करी का मामला दर्ज था। वहीं, 2013 में महाराष्ट्र में भी बाघ के शिकार और अवैध व्यापार के अलग मामले उसके खिलाफ चल रहे थे।
महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी तलाश
कल्ला बावरिया लंबे समय से कई राज्यों के वन विभागों और पुलिस के साथ-साथ नेपाल की एजेंसियों की तलाश में था। गिरफ्तारी के बाद उसे प्रोडक्शन वारंट पर महाराष्ट्र के अकोला जिले के वन विभाग को सौंपा गया था। 2025 में STSF ने दो और आरोपियों – पंजाब के होशियारपुर के पुजारी सिंह और रामकुमार सिंह बावरिया – को गिरफ्तार किया, जिन्हें नेटवर्क की अहम कड़ी माना गया। इसके अलावा, असम की रहने वाली टेरोपी नामक महिला को भी गिरोह के संचालन में मदद करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
नेपाल प्रत्यर्पण की तैयारी
मध्य प्रदेश वन विभाग ने बताया कि कल्ला बावरिया को अदालत में प्रस्तुत सबूतों और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर यह सजा मिली है। अब राज्य सरकार केंद्र के माध्यम से नेपाल को प्रत्यर्पित करने की प्रक्रिया शुरू करेगी, जहां उसके खिलाफ लंबित मामले हैं।
वन अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया में फैले अंतरराष्ट्रीय बाघ शिकार और वन्यजीव तस्करी के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना है।
