Friday, February 13

रूस से 288 S-400 मिसाइल खरीद को भारत की हरी झंडी, 10 हजार करोड़ का सौदा; 40 से 400 किमी तक मारक क्षमता

नई दिल्ली। भारत ने अपनी वायु सुरक्षा को और अधिक मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाली 288 सरफेस-टू-एयर मिसाइलों की खरीद को हरी झंडी दे दी है। रक्षा सूत्रों के मुताबिक यह सौदा करीब 10,000 करोड़ रुपये का हो सकता है।

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यह निर्णय ऐसे समय में सामने आया है जब भारत लगातार अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा और दुश्मन के संभावित हवाई हमलों से निपटने की तैयारियों को प्राथमिकता दे रहा है।

रक्षा अधिग्रहण परिषद ने दी मंजूरी

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने रूस से S-400 सिस्टम के लिए 288 मिसाइलों की खरीद को लेकर ‘आवश्यकता की स्वीकृति’ (AoN) प्रदान कर दी है।

सूत्रों के अनुसार यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP) के तहत की जाएगी, जिससे मिसाइलों की डिलीवरी और तैनाती जल्द सुनिश्चित हो सके।

120 कम दूरी और 168 लंबी दूरी की मिसाइलें

रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित सौदे में दो तरह की मिसाइलें शामिल होंगी—

  • 120 कम दूरी वाली मिसाइलें

  • 168 लंबी दूरी वाली मिसाइलें

S-400 प्रणाली में 40 किमी, 150 किमी, 200 किमी और 400 किमी तक की रेंज वाली मिसाइलों का उपयोग किया जाता है, जिससे यह सिस्टम एक ही समय में कई स्तरों पर सुरक्षा कवच तैयार कर देता है।

S-400 की मिसाइलें Mach 14 की रफ्तार से करती हैं हमला

रूस में विकसित S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम में शामिल मिसाइलों की अधिकतम गति 4.8 किलोमीटर प्रति सेकंड बताई जाती है, जो लगभग Mach 14 के बराबर है।

इतनी तेज रफ्तार के कारण यह प्रणाली दुश्मन के

  • फाइटर जेट

  • ड्रोन

  • क्रूज मिसाइल

  • बैलिस्टिक मिसाइल
    जैसे हवाई खतरों को बेहद कम समय में ट्रैक कर इंटरसेप्ट करने में सक्षम मानी जाती है।

इस साल मिलेंगे S-400 के बाकी दो स्क्वाड्रन

रक्षा सूत्रों के अनुसार रूस ने भारत को भरोसा दिलाया है कि S-400 के कुल पांच स्क्वाड्रन में से बचे हुए दो स्क्वाड्रन भी इसी वर्ष भारत को सौंप दिए जाएंगे।

  • चौथा स्क्वाड्रन जून 2026 तक

  • पांचवां स्क्वाड्रन नवंबर 2026 तक मिलने की संभावना है।

ऑपरेशन सिंदूर में दिखी S-400 की ताकत

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने S-400 सिस्टम का प्रभावी इस्तेमाल कर पाकिस्तान के कई हवाई प्रयासों को विफल कर दिया था।

इस ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायु सुरक्षा प्रणाली ने दुश्मन के फाइटर जेट्स, निगरानी विमान और कई कॉम्बैट ड्रोन को सफलतापूर्वक निष्क्रिय किया था। इसके बाद भारतीय सेना के लिए S-400 मिसाइलों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना रणनीतिक जरूरत बन गया।

314 किलोमीटर अंदर तक टारगेट पर हमला

रिपोर्ट के अनुसार भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित एक बड़े टोही और निगरानी विमान को S-400 की लंबी दूरी वाली मिसाइल से 314 किलोमीटर दूर निशाना बनाकर गिराया था।

इस घटना के बाद पाकिस्तानी सेना को अपने कई सैन्य विमान अफगानिस्तान और ईरान सीमा के पास मौजूद एयरबेस पर शिफ्ट करने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

पाकिस्तानी रडार सिस्टम को बताया गया निष्क्रिय

खबर के मुताबिक आदमपुर और भुज सेक्टर में तैनात S-400 सिस्टम ने पाकिस्तान के लाहौर, रावलपिंडी, सियालकोट और पसरूर जैसे क्षेत्रों में मौजूद रडार सिस्टम को बाधित कर दिया था, जिससे पाकिस्तान की वायुसेना की गतिविधियां सीमित हो गई थीं।

भारत की वायु सुरक्षा को मिलेगा निर्णायक बल

विशेषज्ञों का मानना है कि S-400 के लिए 288 अतिरिक्त मिसाइलों की खरीद भारत की हवाई सुरक्षा क्षमता को नई मजबूती देगी। इससे न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा कवच और मजबूत होगा, बल्कि दुश्मन देश की हवाई रणनीति पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

यह सौदा भारत की रक्षा तैयारियों को आधुनिक बनाने और रणनीतिक बढ़त हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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