
नई दिल्ली। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव और आक्रामक रणनीति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को अपना सबसे अहम रक्षा साझीदार करार दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि चीन की चुनौती से निपटने के लिए भारत के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना अमेरिका की प्राथमिकताओं में शामिल है।
अमेरिकी कांग्रेस के समक्ष दिए बयान में ब्यूरो ऑफ साउथ एंड सेंट्रल एशियन अफेयर्स के असिस्टेंट सेक्रेटरी एस पॉल कपूर ने कहा कि भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी सिर्फ व्यापारिक सौदे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक मजबूती और सुरक्षा संतुलन का बड़ा आधार है।
कांग्रेस में बयान: अमेरिका की साउथ एशिया नीति में भारत सबसे अहम
एस पॉल कपूर ने 11 फरवरी को अमेरिकी कांग्रेस में ‘साउथ एशिया: यूएस फॉरेन पॉलिसी इन द रीजन’ विषय पर एक सब-कमेटी के सामने बोलते हुए कहा कि अमेरिका का फोकस दक्षिण एशिया में व्यापार, रक्षा सहयोग और लक्षित निवेश को बढ़ाने पर है।
उन्होंने कहा कि भारत के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकी हिंद-प्रशांत में चीन के खिलाफ संतुलन बनाने में निर्णायक साबित होगी।
10 वर्षीय रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क पर जोर
कपूर ने अमेरिका-भारत संबंधों में रक्षा सहयोग को एक मजबूत स्तंभ बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच हाल में हुई ट्रेड डील और प्रस्तावित 10 वर्षीय रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क रणनीतिक रिश्तों को और गहराई देंगे।
उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में बड़े समझौते हो सकते हैं।
भारत को अमेरिकी हथियार प्रणाली देने की तैयारी
कपूर ने कहा कि भारत को अमेरिकी हथियार प्रणाली देने की योजना ‘पाइपलाइन में’ है। यानी अमेरिका से भारत को आधुनिक सैन्य उपकरणों की बिक्री और आपूर्ति पर बातचीत चल रही है।
उनका कहना था कि इससे भारत की संप्रभुता और रक्षा क्षमता मजबूत होगी, साथ ही अमेरिका में रक्षा विनिर्माण से जुड़ी नौकरियों को भी फायदा मिलेगा।
कपूर का संदेश: आत्मनिर्भर भारत ही चीन को रोक सकता है
असिस्टेंट सेक्रेटरी एस पॉल कपूर ने साफ कहा कि यह सहयोग केवल लेन-देन नहीं बल्कि रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा,
“एक सक्षम और आत्मनिर्भर भारत चीन को हिंद-प्रशांत क्षेत्र से दूर रखने में मददगार होगा।”
यह बयान संकेत देता है कि अमेरिका अब भारत को केवल सहयोगी नहीं, बल्कि चीन के खिलाफ रणनीतिक ढाल के रूप में देख रहा है।
भारत को बताया ‘वाइटल स्ट्रैटेजिक पार्टनर’
हाउस फॉरेन अफेयर्स साउथ और सेंट्रल एशिया सब-कमेटी के चेयरमैन बिल हुईजेंगा ने भी भारत की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
उनके मुताबिक भारत अमेरिका के लिए एक वाइटल स्ट्रैटेजिक पार्टनर बना हुआ है।
क्या है अमेरिका-भारत डिफेंस फ्रेमवर्क?
रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को लेकर एक बड़ा समझौता तैयार किया गया था। इसे ‘फ्रेमवर्क फॉर द यूएस-इंडिया मेजर डिफेंस पार्टनरशिप’ नाम दिया गया।
इस पर दोनों देशों ने दस्तखत कर रक्षा साझेदारी को नई दिशा दी थी।
इससे पहले मलेशिया के कुआलालंपुर में ASEAN रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी सेक्रेटरी ऑफ वॉर पीटर हेजेसेथ की बैठक हुई थी। वहां हेजेसेथ ने भारत को मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्राथमिक देश बताया था।
पाकिस्तान को भी बताया ‘महत्वपूर्ण’, लेकिन भारत से अलग स्तर
हालांकि एस पॉल कपूर ने पाकिस्तान को भी क्षेत्र में अमेरिका का एक “महत्वपूर्ण साझीदार” बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ क्रिटिकल मिनरल्स और आतंकवाद-रोधी सहयोग पर काम कर रहा है।
कपूर के अनुसार यह सहयोग पाकिस्तान को उसके आंतरिक खतरों और पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों से निपटने में मदद करेगा, जो अन्य देशों के लिए भी खतरा हैं।
यह बयान अप्रत्यक्ष रूप से इस बात की पुष्टि करता है कि अमेरिका भी मानता है कि पाकिस्तान में आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं।
पाकिस्तान के मंत्री का बयान: ‘अमेरिका ने टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल किया’
इस रिपोर्ट में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का हालिया बयान भी चर्चा में है। उन्होंने पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कहा था कि अमेरिका ने पाकिस्तान का इस्तेमाल ‘टॉयलेट पेपर’ की तरह किया।
ख्वाजा आसिफ ने दावा किया कि पाकिस्तान ने अपनी नीतियां केवल अमेरिका को खुश करने के लिए बदलीं और बदले में उसे सिर्फ नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने अफगानिस्तान का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लंबे समय तक अमेरिका और रूस की प्रतिस्पर्धा में पाकिस्तान को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया गया।
रणनीतिक संदेश साफ: अमेरिका को भारत चाहिए, पाकिस्तान मजबूरी
अमेरिका के इन बयानों से यह स्पष्ट है कि हिंद-प्रशांत में चीन को रोकने के लिए अमेरिका की रणनीति में भारत केंद्रीय भूमिका निभा रहा है। वहीं पाकिस्तान को अमेरिका अब भी उपयोगी मानता है, लेकिन उसे दूसरे दर्जे का साझीदार ही समझ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में अमेरिका-भारत रक्षा संबंध और मजबूत हो सकते हैं, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ेगा।
