
नई दिल्ली/पटना: भारतीय सेना, नेवी और एयरफोर्स के अग्निपथ स्कीम के पहले बैच का इस साल आगमन होने वाला है। अगले महीने से नेवी के पहले बैच के लगभग 2,600 अग्निवीरों चार साल का कार्यकाल पूरा कर बाहर आएंगे। इसके बाद आर्मी और एयरफोर्स के अग्निवीरों का पहला बैच क्रमशः अगले साल की शुरुआत में बाहर आएगा।
कितनों को मिलेगा स्थायी रोजगार?
अग्निपथ योजना के तहत, पहले बैच में से केवल 25% अग्निवीरों को परमानेंट किया जाएगा, जबकि बाकी 75% बाहर होंगे। यही वह असली “अग्निपरीक्षा” होगी, जब यह देखना होगा कि बाहर होने वाले युवा अग्निवीरों को आगे कितने और किस तरह के रोजगार मिल पाते हैं। सरकार का दावा है कि इसके लिए CAPF और कुछ राज्य सरकारों में कोटा व्यवस्था लागू की गई है।
तीनों सेनाओं की सिफारिश रही है कि कम से कम 40-50% और कुछ मामलों में 70% तक अग्निवीरों को स्थायी किया जाना चाहिए। हालांकि, सरकार ने संकेत दिए हैं कि चार साल के कार्यकाल में वृद्धि पर फिलहाल विचार नहीं किया जाएगा। लेकिन रिटेंशन रेट यानी कितने अग्निवीरों को स्थायी करना है, इसमें बदलाव का अवसर पहले बैच के बाहर आने के बाद आ सकता है।
बदलाव का अवसर और कानूनी चुनौती:
अगर पहले बैच से केवल 25% को ही परमानेंट किया गया और आगे जाकर अन्य बैचों में अधिक अग्निवीरों को स्थायी किया गया, तो इसके कारण कोर्ट केस की संभावना बढ़ सकती है। रक्षा मंत्रालय वर्तमान में कई केस लड़ रहा है और अग्निवीरों के लिए न्यायसंगत फैसलों के लिए भी अदालत में मामला दर्ज है। वहीं, वीरगति प्राप्त अग्निवीरों या विकलांग हुए जवानों को रेगुलर सैनिकों के बराबर सहायता देने की सेना की सिफारिश पहले ही की जा चुकी है।
राजनीतिक बहस के बावजूद असली परीक्षा करीब है:
लोकसभा में हाल ही में विपक्षी नेताओं द्वारा अग्निपथ योजना पर उठाए गए सवाल और चर्चाओं के बीच, योजना की असली कसौटी अब ज्यादा दूर नहीं है। पहले बैच के परिणाम और रोजगार के फैसले भविष्य में योजना के सुधार और स्थायी नीति के लिए दिशा तय करेंगे।
