
दुबई में आयोजित वर्ल्ड हेल्थ एक्सपो (WHX) 2026 में एक नई स्टडी की घोषणा की गई है। इस स्टडी में Huawei Watch GT 6 Pro की टेस्टिंग की जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्मार्टवॉच ब्लड ग्लूकोज लेवल और डायबिटीज रिस्क को कितनी सटीकता से पहचान सकती है।
क्यों हो रही है यह टेस्टिंग
दुनिया भर में लाखों लोग ऐसे हैं जिन्हें यह पता नहीं होता कि उन्हें डायबिटीज का खतरा है। इस वजह से समय रहते डायग्नोसिस और इलाज करना मुश्किल हो जाता है। नई स्मार्टवॉच टेक्नोलॉजी इन लोगों की मदद कर सकती है और समय रहते चेतावनी दे सकती है।
टेस्टिंग में कौन शामिल होगा
स्टडी में कुल 150 लोग शामिल होंगे:
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50 हेल्दी वॉलंटियर्स
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50 डायबिटीज के मरीज
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50 प्री-डायबिटीज वाले लोग, जिनका ब्लड शुगर कभी ज्यादा और कभी कम हो सकता है
इस ग्रुप पर खास ध्यान दिया जाएगा क्योंकि प्री-डायबिटीज वाले लोग अक्सर अपनी स्थिति के बारे में अनजान रहते हैं।
स्मार्टवॉच और ट्रेडिशनल टेस्ट की तुलना
स्टडी में स्मार्टवॉच की रीडिंग की तुलना ट्रेडिशनल कैपिलरी ग्लूकोज मॉनिटर से की जाएगी। ट्रेडिशनल टेस्ट में उंगली पर सुई चुभाकर ब्लड की एक बूंद से ग्लूकोज टेस्ट किया जाता है।
Huawei ने WHX 2026 में Huawei Health Strategy and Research Platform इवेंट के दौरान डायबिटीज रिस्क के नए फीचर की घोषणा की थी, और अब इसकी टेस्टिंग शुरू हुई है।
टेक्नोलॉजी कैसे काम करती है
Huawei Watch GT 6 Pro में फोटोप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। यह ऑप्टिकल तरीका है, जो लाइट सेंसर के जरिए ब्लड ग्लूकोज का अनुमान लगाता है।
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यह स्मार्टवॉच स्किन के नीचे इंस्टॉल किए जाने वाले मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटर से अलग है।
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वॉच डायबिटीज का डायग्नोसिस नहीं करेगी, बल्कि यह सिर्फ संकेत देगी कि ग्लूकोज लेवल बढ़ा हुआ है।
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इसके आधार पर उपयोगकर्ता डॉक्टर से लैब टेस्ट करवाने का निर्णय ले सकते हैं।
जल्दी पता लगाना क्यों जरूरी है
डॉ. मरियम अल सईद ने बताया कि दुनिया भर में 500 मिलियन से ज्यादा लोग टाइप 1 या टाइप 2 डायबिटीज के साथ जी रहे हैं।
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बहुत से लोग डायबिटीज के बारे में अनजान हैं, क्योंकि उन्होंने कभी चेकअप नहीं करवाया।
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प्री-डायबिटीज वाले दो-तिहाई लोग समय के साथ पूर्ण डायबिटीज में बदल जाते हैं।
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इसलिए, जल्दी चेतावनी और जांच जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
निष्कर्ष
Huawei Watch GT 6 Pro जैसी स्मार्टवॉच तकनीक भविष्य में डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों के शुरुआती संकेत पहचानने में मददगार साबित हो सकती है। यह टेक्नोलॉजी समय रहते चेतावनी देकर लोगों को स्वस्थ जीवन की ओर ले जाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
