
नई दिल्ली। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष के 119 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए दिए गए प्रस्ताव नोटिस में कई गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं। नोटिस में लगातार सामने आ रही गलतियों के कारण अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या सांसदों ने बिना ठीक से पढ़े और जांचे ही इस पर हस्ताक्षर कर दिए।
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की सर्वोच्च संसदीय संस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इस तरह की लापरवाही विपक्ष की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रही है।
नोटिस में बार-बार गलत वर्ष का उल्लेख
न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए दिए गए नोटिस में कई स्थानों पर फरवरी 2025 की घटनाओं का उल्लेख कर दिया गया है, जबकि मामला वर्तमान वर्ष से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि नोटिस में चार बार वर्ष 2025 की तारीखें दर्ज की गई हैं।
संसदीय नियमों के अनुसार, यदि नोटिस में प्रक्रिया संबंधी त्रुटियां या तथ्यात्मक गलतियां होती हैं, तो उसे खारिज किए जाने की संभावना भी बन सकती है।
पहले भी सुधारी जा चुकी है नोटिस
जानकारी के अनुसार, जब यह नोटिस मंगलवार को लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया, तब उसमें 2026 की जगह 2025 लिखा गया था। बाद में इसे संशोधित कर वर्ष 2026 कर दिया गया।
हालांकि अब सामने आया है कि नोटिस में अभी भी पिछली घटनाओं से संबंधित गलत तारीखें दर्ज हैं, जो एक बार फिर विपक्ष की तैयारी पर सवाल खड़े कर रही हैं।
क्या सुधार के बाद आगे बढ़ेगी प्रक्रिया?
इस मामले में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने सचिवालय को निर्देश दिया है कि नोटिस में जो भी त्रुटियां हैं, उन्हें ठीक कराकर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाए।
बताया गया है कि संशोधित नोटिस मिलने के बाद लोकसभा सचिवालय द्वारा नियमों के तहत उसकी जांच की जाएगी और फिर उसे बजट सत्र के दूसरे चरण के समाप्त होने के बाद सूचीबद्ध किया जा सकता है।
119 सांसदों के हस्ताक्षर, फिर भी नजर नहीं पड़ी?
इस नोटिस में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पर हस्ताक्षर करने वाले सांसदों में कई बड़े और अनुभवी नाम शामिल हैं।
नोटिस पर हस्ताक्षर करने वालों में केसी वेणुगोपाल, टीआर बालू, गौरव गोगोई, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव, आदित्य यादव, कुमारी शैलजा, शशि थरूर, अक्षय यादव, मीसा भारती और तारिक अनवर जैसे प्रमुख सांसदों के नाम भी शामिल हैं।
इतने वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर होने के बावजूद नोटिस में गंभीर त्रुटियां बने रहना विपक्ष की रणनीति और दस्तावेजी तैयारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई चर्चा
लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से बेहद गंभीर और संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में विपक्ष की ओर से प्रस्तुत नोटिस में लगातार सामने आ रही गलतियां राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई हैं।
अब देखना होगा कि सुधार के बाद यह नोटिस प्रक्रिया में आगे बढ़ता है या फिर नियमों के तहत इसे अस्वीकार कर दिया जाता है।
