Wednesday, February 11

राजपाल यादव की फिल्म ‘अता पता लापता’ ने किया सबकुछ तहस-नहस, जेल तक जाना पड़ा पड़ा अभिनेता को

बॉलीवुड के चर्चित कॉमेडियन राजपाल यादव की एक फिल्म ‘अता पता लापता’ उनके करियर के लिए भारी साबित हुई। इस फिल्म में कुल 170 कलाकार थे, जिसमें ओम पुरी, असरानी, आशुतोष राणा, मनोज जोशी, गोविंद नामदेव, दारा सिंह, विक्रम गोखले, विजय राज और सत्यदेव दुबे जैसे कई दिग्गज कलाकार शामिल थे। राजपाल यादव ने खुद बताया कि फिल्म में पहली बार फोरग्राउंड में म्यूजिक और बैकग्राउंड में ड्रामा को एक साथ पेश किया गया।

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फिल्म बनाना बना चुनौतीपूर्ण सफर
राजपाल यादव ने अपने प्रोडक्शन हाउस के यूट्यूब चैनल पर खुलकर बताया कि उन्होंने इस फिल्म को आर्थिक और पेशेवर जोखिम उठाकर बनाया। उन्होंने कहा, “ये फिल्म हमारे लिए एक प्रयोग थी, जिसमें 170 कलाकारों ने काम किया। मैंने इसे बनाने से पहले 200-300 बार अपने दिमाग में ही सोच-समझकर पकाया। इसका उद्देश्य था अर्थपूर्ण और मनोरंजक सिनेमा पेश करना।”

फिल्म का टाइटल ‘अता पता लापता’ मजाक-मजाक में रखा गया था। राजपाल ने बताया कि शुरुआत में कुछ और नामों पर विचार हुआ, लेकिन अंततः यह नाम ही चुना गया।

कहानी और थीम
फिल्म की कहानी मानव चतुर्वेदी (राजपाल यादव) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्होंने अपने घर के गायब होने की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई। अचानक उनका घर निर्माण स्थल से गायब हो जाता है। इसके बाद मानव कानून की मदद लेने आता है, लेकिन खुद ही शक के घेरे में फंस जाता है। कहानी प्रशासन, नौकरशाही और सत्ता के रवैये की खामियों पर आधारित है।

फिल्म के कारण आर्थिक संकट और जेल तक सफर
राजपाल यादव ने फिल्म बनाने के लिए 2010 में M/s Murali Projects प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये उधार लिए थे, जो ब्याज समेत 8 करोड़ रुपये तक पहुँच गए। फिल्म उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हुई और राजपाल यादव उस कर्ज को चुकता नहीं कर पाए। इसके चलते कंपनी ने उनके खिलाफ चेक बाउंस के आरोपों के तहत मामला दर्ज कर दिया। इस मामले में उन्हें तिहाड़ जेल में जाना पड़ा।

राजपाल यादव ने लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में बताया कि यह पैसा उन्होंने नहीं लिया बल्कि फाइनैंसर ने निवेश किया ताकि उनके पोते को हीरो बनाया जा सके।

बॉलीवुड से मदद के हाथ बढ़े
हालांकि, राजपाल यादव की मुश्किल समय में उनके चाहने वाले और कई बॉलीवुड सितारे सामने आए। सोनू सूद, तेजप्रताप यादव, केआरके, गुरमीत चौधरी और राव इंद्रजीत सिंह यादव जैसे कई लोगों ने उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया।

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