
पटना: बिहार सरकार ने उर्वरक की कालाबाजारी, जमाखोरी और अधिक मूल्य पर बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। राज्य के 47 उर्वरक दुकानों पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जबकि 124 दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए। इस कार्रवाई से खाद व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
कृषि विभाग की निगरानी लगातार जारी है और जिन भी प्रतिष्ठानों को कालाबाजारी या जमाखोरी में पाया जाएगा, उन पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाएगी। राज्य सरकार का उद्देश्य रबी सीजन में किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराना है।
उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता
हालांकि इस सघन अभियान का बाजार पर असर पड़ा है, लेकिन राज्य सरकार ने किसानों की खाद उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। बिहार में इस समय 1.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 1.45 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 2.06 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 0.43 लाख मीट्रिक टन एमओपी और 1.05 लाख मीट्रिक टन SSP उपलब्ध हैं। इन भंडारणों से किसानों की आवश्यकताओं को पूरी तरह पूरा किया जा सकता है।
फ्लाइंग स्क्वॉयड टीम होगी सतत निगरानी में
उर्वरक आपूर्ति और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सरकार ने फ्लाइंग स्क्वॉयड टीम का गठन किया है। ये टीम प्राप्त शिकायतों के आधार पर निरंतर छापेमारी करेगी। कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने निर्देश दिए हैं कि जिलेवार जांच दल नियमित रूप से उर्वरक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण और छापेमारी करें। सीमा क्षेत्र वाले जिलों में विशेष दल सशस्त्र सीमा बल के साथ मिलकर उर्वरक तस्करी पर रोक लगाएंगे।
अन्य उत्पादों के साथ जबरन टैगिंग पर रोक
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुदानित उर्वरकों (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी) के साथ किसी अन्य उत्पाद की जबरन टैगिंग करना नियमों का उल्लंघन है। जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कृषि विभाग ने इस प्रथा को रोकने का आदेश जारी किया है। इस तरह की अनियमितताओं को किसी भी हालात में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
राज्य सरकार का यह कड़ा कदम किसानों को उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने और कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
