
नई दिल्ली: नया घर बनाना जीवन भर की जमा-पूंजी का सबसे बड़ा निवेश होता है। ऐसे में थोड़े पैसे बचाने के चक्कर में पुरानी ईंटों का इस्तेमाल करना बेहद हानिकारक साबित हो सकता है। सिविल इंजीनियर दीपक कुमार के अनुसार, पुरानी ईंटें न केवल घर की मजबूती को कम करती हैं, बल्कि सीलन और शोरा जैसी गंभीर समस्याएं भी ला सकती हैं।
ईंटों की मजबूती और ड्यूरेबिलिटी में कमी
बीस से तीस साल पुराने घर से निकली ईंटें समय के साथ कमजोर हो चुकी होती हैं। धूप, बारिश और मौसम की मार झेलने के कारण इनकी भार सहने की क्षमता कम हो जाती है। ऐसे ईंटों से नई दीवारें भारी लोड सहने में सक्षम नहीं होतीं।
आकार और साइज का सही न होना
पुरानी ईंटें अक्सर टूट-फूट और टेढ़ी-मेढ़ी हो जाती हैं। इनके आकार और साइज में असमानता के कारण चिनाई में समस्या आती है और दीवारें टेढ़ी-मेढ़ी दिख सकती हैं।
मसाले की अधिक खपत और कमजोर जोड़
टेढ़ी-मेढ़ी ईंटों के बीच गैप भरने के लिए ज्यादा सीमेंट और रेत की जरूरत पड़ती है। इससे न केवल निर्माण लागत बढ़ती है, बल्कि दीवार की मजबूती भी कम हो जाती है।
सीलन और साल्ट पीटर का खतरा
पुरानी ईंटें पहले से ही नमी सोख चुकी होती हैं, जिससे नए घर में दीवारों पर जल्दी सीलन और पपड़ी आने लगती है। साथ ही, इनमें ‘शोरा’ की समस्या भी हो सकती है। नमक की अधिकता से प्लास्टर और पेंट जल्दी झड़ जाते हैं, और दीवारें खोखली हो सकती हैं।
निर्माण कार्य में देरी और लागत में वृद्धि
पुरानी ईंटों को साफ करना, छांटना और फिट करना समय लेने वाला काम है। इससे मजदूरी और अतिरिक्त मसाले में खर्च बढ़ जाता है, और निर्माण कार्य में देरी हो सकती है।
पुरानी ईंटों का सही इस्तेमाल
इंजीनियर दीपक कुमार के अनुसार, अगर पुरानी ईंटें बच गई हों, तो उन्हें मुख्य दीवारों में लगाने की बजाय इन जगहों पर इस्तेमाल किया जा सकता है:
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फर्श बनाने से पहले बेस तैयार करने के लिए
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घर की मुख्य दीवार के बजाय बाहरी बाउंड्री की नींव में
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छत पर ढलान या कच्ची सड़कों के भराव के लिए
निष्कर्ष: घर की दीवारों और नींव की मजबूती जीवन और निवेश दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए पुरानी ईंटों का इस्तेमाल केवल सहायक कार्यों में ही करना चाहिए, वरना भविष्य में भारी पछतावा करना पड़ सकता है।
