
ढाका, बांग्लादेश: बांग्लादेश में गुरुवार 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी को लेकर लोगों में डर और आशंकाएं तेज हो गई हैं। अवामी लीग के नेतृत्व के बाहर होने के बाद देश में कट्टर इस्लामिक पार्टी की पकड़ मजबूत हुई है और इसके समर्थकों ने चुनावी मैदान में सक्रियता दिखाना शुरू कर दिया है।
इस चुनाव में मुख्य मुकाबला बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन के बीच माना जा रहा है। अवामी लीग के गैर-मौजूद रहने से पाकिस्तान समर्थक मानी जाने वाली जमात पर सभी की निगाहें हैं। फिल्म और कला जगत की हस्तियां भी इसके चुनावी असर को लेकर चिंतित हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी ने हाल के समय में वोटरों का ध्यान आकर्षित किया है। 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान की ओर रहने के कारण पार्टी पर ऐतिहासिक संदेह है।
अंतरिम सरकार के दौरान जमात समर्थकों ने पुलिस, सेना और प्रशासन में अहम पदों पर कब्जा किया है। इसमें गृह सचिव नसीमुल गनी और मुख्य चुनाव आयुक्त AMM नासिरउद्दीन जैसे अधिकारी शामिल हैं, जिनके कट्टर इस्लामिक विचार के कारण चिंता बढ़ रही है।
चुनाव से पहले पार्टी ने ढाका और अन्य शहरों में लाखों नेशनल आइडेंटिटी कार्ड जुटाए और सत्ता में आने पर सरकारी दफ्तरों और अदालतों में काम बिना रिश्वत के करने का वादा किया। वहीं, छात्र संगठन छात्र शिबिर ने चेतावनी दी है कि अगर जमात हारती है तो हिंसा फैल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव में अराजक तत्वों और हथियारों के इस्तेमाल की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश में बढ़ती हिंसा और विभाजन ने इस चुनाव को अब तक के सबसे संवेदनशील और जोखिमपूर्ण चुनावों में से एक बना दिया है।
