Wednesday, February 11

₹50 लाख की नौकरी छोड़ी, बन गए ‘मोमोज माफिया’… ढाई साल में ही कमा डाले ₹5 करोड़

नई दिल्ली। आज के दौर में जहां लोग बड़ी नौकरी छोड़ने से पहले कई बार सोचते हैं, वहीं गुरुग्राम के युवा उद्यमी साकेत सौरभ ने 50 लाख रुपये सालाना की मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर ऐसा कदम उठाया, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी। साल 2023 में उन्होंने ‘द मोमोज माफिया’ नाम से अपने बिजनेस की शुरुआत की और महज दो से ढाई साल के भीतर ही इस स्टार्टअप से 5 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली।

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आज ‘द मोमोज माफिया’ एक तेजी से बढ़ता ब्रांड बन चुका है, जो फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता है और देश के 7 राज्यों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है।

NIFT से पढ़ाई, फिर स्टार्टअप की दुनिया में कदम

साकेत सौरभ ने वर्ष 2014 में NIFT दिल्ली से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने उद्यमिता की राह पकड़ी और ‘Wowflux’ नाम की कंपनी की सह-स्थापना की। बाद में इस कंपनी का अधिग्रहण FlixStock द्वारा कर लिया गया। इसके बाद साकेत FlixStock में प्रोडक्ट मैनेजर के पद पर कार्य करने लगे और वहीं से उन्हें सालाना 50 लाख रुपये का पैकेज मिला।

नौकरी के साथ शुरू किया कैफे, मोमोज बने सबसे ज्यादा बिकने वाला आइटम

नौकरी करते हुए भी साकेत का बिजनेस के प्रति जुनून कम नहीं हुआ। उन्होंने अपनी बहन और जीजा के साथ मिलकर गुरुग्राम में ‘बैम्बू कैफे’ शुरू किया। यह कैफे कई तरह के व्यंजन परोसता था, लेकिन ग्राहकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय रहे मोमोज

साकेत ने प्रयोग के तौर पर कैफे के बाहर केवल मोमोज बेचने के लिए एक छोटा कैनोपी स्टॉल लगाया। यहीं से उनके बिजनेस को नई दिशा मिलने लगी।

ठेले से शुरू हुआ सफर, रोजाना 12 हजार रुपये की बिक्री

इसके बाद साकेत ने गुरुग्राम के इन्फोटेक इलाके में एक मोमो ठेला लगाया। इस ठेले ने उम्मीद से कहीं ज्यादा सफलता हासिल की। जल्द ही इस ठेले से रोजाना 10 हजार से 12 हजार रुपये तक की बिक्री होने लगी।

इसी दौरान कई ऑफिस कर्मचारियों ने उनसे संपर्क किया और मोमो कार्ट खोलने की इच्छा जताई। यहीं से साकेत को फ्रेंचाइजी मॉडल का विचार आया और ‘द मोमोज माफिया’ का विस्तार शुरू हो गया।

कार्ट मॉडल में आई परेशानियां, फिर निकाला नया रास्ता

हालांकि शुरुआत में मोमो कार्ट मॉडल ने अच्छा फायदा दिया, लेकिन समय के साथ इसमें कई चुनौतियां सामने आने लगीं। कभी नगर निगम या प्रशासन की कार्रवाई के चलते कार्ट हटाए जाते, तो कभी स्टाफ की समस्या आती। इसके अलावा मौसम और ऑपरेशन से जुड़ी दिक्कतें भी लगातार बनी रहतीं।

साकेत को यह एहसास हो गया कि केवल कार्ट के भरोसे लंबे समय तक बड़ा ब्रांड खड़ा करना मुश्किल है।

छोटी दुकानों से बढ़ाया कारोबार, CSR मॉडल अपनाया

दूसरे साल साकेत ने रणनीति बदली और छोटे आउटलेट खोलने शुरू किए। उन्होंने इसे नाम दिया CSR मॉडल (Cart Service Restaurant), जिसमें दुकान के बाहर कार्ट भी लगाया जाता है।

आज ‘द मोमोज माफिया’ के पास करीब—

  • 40 मोमो कार्ट

  • 20 छोटे आउटलेट

  • 2 फुल क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR)

मौजूद हैं, जो तेजी से विस्तार कर रहे हैं।

ढाई साल में 5 करोड़ से ज्यादा की कमाई

‘द मोमोज माफिया’ को आधिकारिक रूप से जनवरी 2024 में रजिस्टर किया गया। इस बिजनेस में साकेत के साथ कुल पांच पार्टनर हैं— एकता कुमारी, गौतम, सूर्य प्रकाश और शुभम ठाकुर

कंपनी ने पहले साल में लगभग 16 लाख रुपये का कारोबार किया। वित्त वर्ष 2023-24 के जनवरी, फरवरी और मार्च तीन महीनों में ही 16 लाख की कमाई हुई। इसके बाद अगले साल कंपनी का टर्नओवर 2.2 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

इस साल भी अब तक 2.2 करोड़ रुपये का कारोबार हो चुका है और अनुमान है कि यह आंकड़ा 3 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इस तरह कुल मिलाकर साकेत सौरभ ने दो-ढाई साल में 5 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई कर ली है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बन रहे साकेत सौरभ

साकेत सौरभ की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के साथ अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं। एक ठेले से शुरुआत कर उन्होंने ऐसा ब्रांड खड़ा कर दिया, जो अब देश के कई राज्यों में फैल चुका है। ‘द मोमोज माफिया’ आज सिर्फ एक बिजनेस नहीं, बल्कि मेहनत, सोच और साहस का उदाहरण बन चुका है।

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