
नई दिल्ली। भारत क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिजों) की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए तेजी से वैश्विक स्तर पर कदम बढ़ा रहा है। खासतौर पर लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों को लेकर भारत की चिंता बढ़ती जा रही है, क्योंकि इनकी सप्लाई और प्रोसेसिंग पर चीन का भारी दबदबा है। ऐसे में भारत अब चीन पर निर्भरता कम करने के लिए ब्राजील, कनाडा, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों के साथ अहम बातचीत कर रहा है।
सूत्रों के अनुसार यह बातचीत ज्वाइंट एक्सप्लोरेशन, एक्सट्रैक्शन, प्रोसेसिंग और रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग को लेकर हो रही है। भारत की कोशिश है कि वह केवल खनिज आयात तक सीमित न रहे, बल्कि खनन से लेकर प्रोसेसिंग तक पूरी सप्लाई चेन में अपनी मजबूत पकड़ बनाए।
चीन की मोनोपॉली से बढ़ी चिंता
क्रिटिकल मिनरल्स के मामले में चीन न केवल खनिजों के उत्पादन में आगे है, बल्कि प्रोसेसिंग तकनीक और वैश्विक सप्लाई नेटवर्क पर भी उसकी पकड़ मजबूत है। भारत के लिए यह स्थिति खतरनाक मानी जा रही है क्योंकि भविष्य की ऊर्जा जरूरतें—जैसे इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर एनर्जी, विंड टरबाइन और एडवांस इलेक्ट्रॉनिक्स—इन खनिजों पर ही निर्भर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन इन संसाधनों को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर सकता है, जिससे वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है।
भारत समाधान की दिशा में सक्रिय
भारत ने इस दिशा में पहले भी कई अहम कदम उठाए हैं। जनवरी में भारत ने जर्मनी के साथ एक समझौता किया था, जिसके तहत दोनों देश और तीसरे देशों में भी क्रिटिकल मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और मिनरल एसेट्स के विकास पर मिलकर काम करेंगे।
वर्तमान में इस प्रयास का नेतृत्व खनन मंत्रालय कर रहा है। एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत फ्रांस, नीदरलैंड और ब्राजील से सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है, जबकि कनाडा के साथ समझौते पर गंभीरता से विचार चल रहा है।
कनाडा के साथ बड़ी डील की संभावना
खबरों के मुताबिक कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च की शुरुआत में भारत दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान यूरेनियम एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है।
कनाडा के प्राकृतिक संसाधन विभाग ने पहले ही संकेत दिए हैं कि दोनों देश आने वाले हफ्तों में महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार हैं।
भारत पहले भी कई देशों से कर चुका है समझौते
भारत ने क्रिटिकल मिनरल्स के लिए पहले ही अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ समझौते किए हैं। इसके अलावा पेरू और चिली के साथ भी व्यापक द्विपक्षीय समझौतों पर बातचीत चल रही है, जिनमें क्रिटिकल मिनरल्स अहम हिस्सा हैं।
जी7 देशों की भी चिंता, चीन पर घटेगा भरोसा
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति बना रही हैं। हाल ही में वॉशिंगटन में हुई बैठक में जी7 और अन्य प्रमुख देशों के वित्त मंत्रियों ने दुर्लभ पृथ्वी तत्वों को लेकर चीन की निर्भरता कम करने के विकल्पों पर चर्चा की थी।
इन देशों का मानना है कि चीन भविष्य में रेयर अर्थ सप्लाई को रोककर दबाव बनाने की नीति अपना सकता है।
भारत ने 20 से ज्यादा खनिजों को घोषित किया ‘महत्वपूर्ण’
भारत ने वर्ष 2023 में लिथियम सहित 20 से अधिक खनिजों को ऊर्जा संक्रमण और औद्योगिक विकास के लिए “महत्वपूर्ण” श्रेणी में रखा है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, उद्योग और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए जरूरी इन संसाधनों पर आत्मनिर्भर बने।
सप्लाई चेन में भारत पलट सकता है बाजी
विशेषज्ञों के अनुसार यदि भारत इन देशों के साथ समझौते करने में सफल हो जाता है, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी जरूरतें पूरी करेगा, बल्कि ग्लोबल क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन में बड़ा खिलाड़ी बनकर उभर सकता है।
यह रणनीति भारत के लिए केवल आर्थिक नहीं बल्कि रणनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से भी बेहद अहम मानी जा रही है।
