
नई दिल्ली। चीन से बाहर निकल रही अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक मजबूत मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन डेस्टिनेशन बन सकता है। यह बयान अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने दिया है। उन्होंने कहा कि भारत में वह सभी संसाधन और क्षमताएं मौजूद हैं, जो उसे चीन का एक बेहतर विकल्प बना सकती हैं।
ग्रीर ने मंगलवार को फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत अब अमेरिका के साथ अपनी आर्थिक भागीदारी को लगातार मजबूत कर रहा है और चीन पर निर्भरता घटाने की दिशा में अमेरिका के लिए भारत एक अहम विकल्प बनकर उभर सकता है।
भारत की भूमिका को लेकर अमेरिका का स्पष्ट संकेत
जैमिसन ग्रीर ने कहा कि भारत ने पहले ही रूसी ऊर्जा उत्पादों की खरीद में कमी करना शुरू कर दिया है और इसके बजाय अमेरिकी ऊर्जा तथा अन्य स्रोतों से आयात बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रहा है। उन्होंने इसे भारत की बदलती रणनीतिक प्राथमिकताओं का संकेत बताया।
ग्रीर ने दावा किया कि भारत आने वाले पांच वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा, विमान और तकनीक के क्षेत्र में लगभग 500 अरब डॉलर तक की खरीद के लिए प्रतिबद्ध हो सकता है। यह प्रतिबद्धता दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई दे सकती है।
रूसी तेल खरीद पर भी बोले ग्रीर
ग्रीर ने कहा कि वर्ष 2022 से पहले भारत रूस से तेल नहीं खरीदता था, लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रूस द्वारा दिए जा रहे भारी डिस्काउंट के कारण भारत ने रूसी तेल का आयात बढ़ाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत और यूरोप रूसी ऊर्जा खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से रूस के युद्ध को वित्तीय समर्थन दे रहे थे।
हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत अब अपनी नीति में बदलाव ला रहा है और अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सप्लाई चेन का नया केंद्र बन सकता है भारत
जब ग्रीर से पूछा गया कि क्या चीन पर निर्भरता कम करने वाली अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत एक व्यवहारिक सप्लाई चेन विकल्प बन सकता है, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा—“यह हो सकता है।”
उन्होंने कहा कि कई कंपनियां पहले से ही चीन से बाहर निकलने की दिशा में काम कर रही हैं और अमेरिका चाहता है कि सप्लाई चेन अधिक से अधिक अपने देश के करीब रहें। लेकिन जहां अन्य देशों से आयात करना जरूरी होगा, वहां भारत एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
भारत की ताकत: जनसंख्या और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता
ग्रीर ने भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास बड़ी जनसंख्या, श्रमबल और उत्पादन क्षमता है, जो उसे वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में मदद कर सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की प्राथमिकता अमेरिकी उद्योग और श्रमिक रहेंगे, लेकिन संतुलित और निष्पक्ष व्यापार की स्थिति में भारत एक भरोसेमंद स्रोत बन सकता है।
भू-राजनीतिक माहौल में बढ़ रहा भारत का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी कंपनियां भू-राजनीतिक जोखिम, टैरिफ नीति और सप्लाई चेन की सुरक्षा को लेकर गंभीरता से विचार कर रही हैं। चीन में बढ़ती अनिश्चितता और वैश्विक तनाव के बीच भारत को एक संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए अवसर, दुनिया की नजरें मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर
अमेरिका के इस बयान को भारत के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है। यदि भारत अपनी नीतियों को और मजबूत करता है तथा निवेश अनुकूल वातावरण बनाता है, तो आने वाले वर्षों में भारत चीन की जगह वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग बेस बनने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ा सकता है।
