
जयपुर: राजस्थान विधानसभा में आज उपमुख्यमंत्री (वित्त) दीया कुमारी बजट पेश करेंगी, लेकिन पिछली घोषणाओं की प्रगति पर कई सवाल उठ रहे हैं। पिछले बजट में की गई कई महत्वपूर्ण घोषणाएं अब तक जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर पाई हैं। यहाँ उन दस प्रमुख घोषणाओं का ब्यौरा है जो अभी लंबित हैं:
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दौसा में जीरो एक्सीडेंट जोन अधूरा
जयपुर-आगरा नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट कम करने के लिए सुधार और जीरो एक्सीडेंट जोन बनाने की योजना अभी तक पूरी नहीं हुई। -
बांसवाड़ा पर्यटन सर्किट अधूरा
त्रिपुरा सुंदरी मंदिर और मानगढ़ धाम को जोड़ने वाला धार्मिक पर्यटन सर्किट केवल कागजों तक ही सीमित रहा। -
कोटा भामाशाह मंडी का विस्तार रुका
96 हेक्टेयर क्षेत्र में मंडी का विस्तार करना था, पर कार्य शुरू नहीं हो पाया। -
डीग ब्रज क्षेत्रीय विकास योजना लंबित
वर्ष 2023-24 में घोषित योजना को 2024-25 में बजट राशि बढ़ाकर 100-100 करोड़ की गई, लेकिन योजना मूर्त रूप नहीं ले सकी। -
जालोर-झालावाड़ रिंग रोड अधूरी
दोनों शहरों के चारों ओर रिंग रोड निर्माण की घोषणा के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ। -
सिरोही में फल-सब्जी मंडी अधूरी
मंडी खोलने और गौण कृषि मंडी स्थापित करने की स्वीकृति अभी तक नहीं मिली। -
सीकर युवा साथी केंद्र नहीं खुला
सीकर में युवा साथी केंद्र खोलने की योजना अभी तक पूरी नहीं हुई। -
अजमेर योग आयुर्वेद यूनिवर्सिटी का इंतजार
बजट में विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा हुई थी, फिलहाल केवल जमीन चिन्हित हुई है। -
झुंझुनूं की घोषणाएं लंबित
मंडावा को क्लीन एंड ग्रीन इको सिटी बनाने और हवाई पट्टी पर फ्लाइंग ट्रेनिंग जैसी योजनाएं अब भी अधूरी हैं। -
टोंक नदी जोड़ो परियोजना अधूरी
बीसलपुर बांध से बनास और रूपारेल नदियों को जोड़ने के लिए डीपीआर और नहरों की मरम्मत की घोषणा के बावजूद काम नहीं शुरू हुआ।
राजस्थान में ये अधूरी घोषणाएं इस बार के बजट के लिए सबकी नजरें टिकी रहने का कारण हैं। वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन के बीच जनता की उम्मीद है कि इस बार बजट से इन लंबित योजनाओं को गति मिले।
