Wednesday, February 11

लखनऊ नगर निगम में 1.14 करोड़ रुपये का गबन, NSA ने पांच कंपनियों के खिलाफ तहरीर दी

लखनऊ: नगर निगम में 1.14 करोड़ रुपये के ईपीएफ और ईएसआई गबन का मामला सामने आया है। आरोप है कि 2013 से 2015 के बीच पाँच हजार से ज्यादा कर्मचारियों की रकम कई कार्यदायी संस्थाओं ने अवैध रूप से डकार ली। यह खुलासा लोक लेखा समिति की जांच में हुआ, जिसे पिछले साल विधानसभा में प्रस्तुत कैग रिपोर्ट के आधार पर गठित किया गया था।

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NSA की कार्रवाई:
नगर स्वास्थ्य अधिकारी (NSA) डॉ. पी.के. श्रीवास्तव ने हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी है। तहरीर में पांच कंपनियों और उनके द्वारा किए गए गबन की राशि का विवरण दिया गया है।

आरोपित कंपनियां और गबन की राशि:

  • मेसर्स राजश्री: 17.88 लाख और 14.31 लाख

  • स्वच्छकार इंटरप्राइजेज: 3.57 करोड़

  • पटवा एसोसिएट: 3.57 करोड़

  • ड्रैगन सिक्योरिटी: 10.73 लाख

  • शार्क सिक्योरिटी: 25 लाख

  • ईगल हंटिंग: 28.62 लाख

  • आर्यन सिक्योरिटी: 10.73 लाख

हालांकि, लॉयन सिक्योरिटी और इससे जुड़ी फर्मों का नाम तहरीर में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि नगर निगम का दावा है कि उन्होंने गबन की गई रकम वापस जमा करवा दी थी।

लोक लेखा समिति की रिपोर्ट:
समिति ने कहा कि पांच हजार से अधिक कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआई का पैसा अवैध रूप से डकारा गया और कार्यदायी संस्थाओं से रिकवरी की पैरवी की गई। इसके आधार पर NSA ने कार्रवाई करते हुए तहरीर दी।

सवाल खड़े होते हैं:

  • इतनी बड़ी धोखाधड़ी सामने आने के बाद लॉयन सिक्योरिटी को ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया?

  • इस फर्म को शहर के प्रमुख जोनों में कूड़ा उठाने और रोड स्वीपिंग का जिम्मा देना नीति पर सवाल खड़ा करता है।

  • बाकी पांच संस्थाओं ने गबन की रकम जमा नहीं करवाई है, उनकी कार्रवाई कब होगी, यह भी महत्वपूर्ण प्रश्न है।

विशेषज्ञों का कहना है कि NSA और निगम की कार्रवाई से भ्रष्टाचार उजागर हुआ, लेकिन जिम्मेदारों के खिलाफ ठोस कदम उठाना अभी भी जरूरी है।

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