
नई दिल्ली। साइबर अपराधी अब लोगों के बैंक अकाउंट खाली करने के लिए SIM Swap या SIM Porting को नया हथियार बना चुके हैं। इस फ्रॉड में आपका मौजूदा SIM कार्ड अपराधियों के पास शिफ्ट कर दिया जाता है और आपके नंबर और OTP तक उनकी पहुंच हो जाती है।
कैसे होता है SIM Swap फ्रॉड
SIM Swap फ्रॉड में साइबर ठग पहले सोशल मीडिया या फिशिंग मैसेज के जरिए आपकी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी बनने का बहाना बनाकर आपका नंबर किसी दूसरे SIM पर एक्टिव कर देते हैं। इस दौरान आपके फोन में सिग्नल गायब हो जाते हैं और कॉल करने पर “No Network” का मैसेज आता है।
इसके तुरंत बाद अपराधी आपके UPI और नेट बैंकिंग पासवर्ड रीसेट कर आपके अकाउंट को खाली कर देते हैं।
कब हो जाएं चौकन्ना
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अचानक फोन का सिग्नल गायब हो जाए और वापस न आए, तो तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें। इसके अलावा अगर कोई व्यक्ति टेलीकॉम कर्मचारी बनकर आपसे OTP मांगता है, तो सावधान हो जाएं।
गोल्डन आवर की अहमियत
साइबर फ्रॉड के शुरुआती तीन घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। इस समय में शिकायत दर्ज कराने पर पुलिस आपके पैसे फ्रीज करने और अपराधियों को ट्रैक करने में सक्षम होती है।
SIM Swap फ्रॉड से बचाव के तरीके
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OTP किसी के साथ कभी साझा न करें।
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अगर SIM स्वैप हो भी जाए, तो तुरंत टेलीकॉम प्रोवाइडर को कॉल करके SIM ब्लॉक कराएं।
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पुलिस को तुरंत सूचित करें।
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गोल्डन आवर में सही कदम उठाने पर बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सावधानी और समय पर कार्रवाई ही SIM Swap फ्रॉड से सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद तरीका है।
