
मुंबई। सोना और चांदी की कीमतों में इस समय अस्थिरता चरम पर है। एक ही दिन में चांदी में 25% तक की गिरावट और सोने में लगभग 10% की गिरावट ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में सीधे कमोडिटीज में निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मल्टी एसेट एलोकेशन म्यूचुअल फंड्स इस अस्थिरता में सुरक्षित और लाभकारी विकल्प साबित हो सकते हैं।
मल्टी एसेट एलोकेशन फंड क्या है?
मल्टी एसेट एलोकेशन फंड एक ऐसा म्यूचुअल फंड है जो इक्विटी, डेट और कमोडिटीज में निवेश करता है। इसमें सोना और चांदी जैसी कीमती धातुएं भी शामिल होती हैं। इस तरह के फंड पोर्टफोलियो का डायवर्सिफिकेशन सुनिश्चित करते हैं और निवेशकों का जोखिम कम करते हैं।
सेबी का निर्देश:
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कम से कम 10% निवेश तीनों एसेट क्लास में करना अनिवार्य है।
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फंड मैनेजर को एसेट क्लास के प्रदर्शन के आधार पर निवेश मिश्रण बदलने की स्वतंत्रता होती है।
रिटर्न का आंकड़ा
पिछले कुछ वर्षों में मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने शानदार प्रदर्शन किया है।
उदाहरण: निप्पॉन इंडिया मल्टी एसेट एलोकेशन फंड
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1 वर्ष का रिटर्न: 23.97%
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2 वर्ष का रिटर्न: 20.47%
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3 वर्ष का रिटर्न: 22.62%
सामान्य रुझान:
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शीर्ष 10 मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स ने पिछले एक वर्ष में औसतन 20.26% और तीन वर्षों में 21.01% CAGR रिटर्न दिया।
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तुलना में, शीर्ष 10 इक्विटी फंड्स का पिछले एक वर्ष में रिटर्न केवल 16.62% रहा।
क्यों है ये फंड खास?
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सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं ने फंड के प्रदर्शन को मजबूती दी।
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अस्थिर इक्विटी बाजार और सीमित डेट रिटर्न के समय निवेशकों को संतुलित और सुरक्षित विकल्प प्रदान किया।
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हाइब्रिड फंड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया।
निष्कर्ष:
जब शेयर बाजार और सोना-चांदी अस्थिर हों, मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स निवेशकों के लिए सुरक्षित, डायवर्सिफाइड और उच्च रिटर्न देने वाला विकल्प साबित हो सकता है।
