
नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से कहा कि देश में हिंदू राष्ट्र बनने का सपना देखने वाले संगठन और सांप्रदायिक ताकतें नेपाल के इतिहास से सबक लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि नफरत और कट्टरता से किसी देश की तरक्की संभव नहीं है।
मदनी ने कहा, “नेपाल में भी इसी तरह की विचारधारा रखने वालों ने हिंदू राष्ट्र स्थापित किया था, लेकिन वह व्यवस्था अंततः समाप्त हो गई और वहां लोकतांत्रिक संविधान के तहत नई व्यवस्था आई। इससे स्पष्ट होता है कि किसी भी देश की वास्तविक प्रगति, स्थिरता और जनकल्याण तभी संभव है, जब वहां लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा हो, न कि किसी एक धर्म या विचारधारा को थोपकर।”
अरशद मदनी ने आगे कहा कि सांप्रदायिक तत्वों की देश को हिंदू राष्ट्र बनाने की कोई भी साजिश सफल नहीं होगी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद सेक्युलरिज्म और भारतीय संविधान की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “इतिहास बताता है कि जो कौम अपनी पहचान, संस्कृति और धर्म के साथ जीना चाहती है, उसे कई कुर्बानियां देनी पड़ती हैं।”
मदनी ने यह भी कहा कि सांप्रदायिक ताकतें इस्लाम और मुसलमान दोनों को मिटाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन “इस्लाम का चिराग कभी बुझ नहीं सकता और जिन्होंने इसे बुझाने की कोशिश की, वे स्वयं मिट गए। हम एक जीवित कौम हैं और अपनी समझ, दूरदर्शिता और रणनीति से सफलता की नई कहानी लिखेंगे।”
अंत में उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात से निराश होने की कोई जरूरत नहीं है। एक दिन ऐसा अवश्य आएगा, जब अत्याचार का अंत होगा और देश फिर प्रेम, सद्भाव और न्याय के मार्ग पर तरक्की करेगा।