Wednesday, March 25

‘मोहम्मद दीपक’ ने 2 लाख रुपये का पुरस्कार लेने से किया इनकार, कहा—राशि दिव्यांग और जरूरतमंद को दें

नैनीताल/कोटद्वार। उत्तराखंड में गणतंत्र दिवस पर हुई एक घटना ने पूरे देश का ध्यान खींचा। कोटद्वार के दीपक कुमार (दीपक कश्यप), जिन्हें अब सोशल मीडिया और जनता ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से जान रही है, ने इस घटना के दौरान एक मुस्लिम बुजुर्ग का साहसपूर्वक बचाव किया था।

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26 जनवरी 2026 को कोटद्वार स्थित बाब स्कूल गारमेंट्स नामक कपड़ा दुकान के बोर्ड पर लिखे ‘बाबा’ शब्द को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और बुजुर्ग को धमकाया। इस समय दीपक कुमार बीच में आए और बुजुर्ग का बचाव किया। उन्होंने अपना नाम मोहम्मद दीपक बताया और हंगामा करने वालों को शांत किया। इस घटना के बाद दीपक सोशल मीडिया, गूगल सर्च और मीडिया में चर्चा का विषय बन गए।

दीपक के साहसपूर्ण काम की सराहना करते हुए झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने उन्हें 2 लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की। हालांकि, दीपक ने इनाम लेने से साफ इनकार करते हुए कहा कि यह राशि किसी दिव्यांग या जरूरतमंद व्यक्ति को दे दी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई संबंध नहीं है और वह राजनीति में शामिल नहीं होना चाहते।

दीपक कुमार के इस कदम की पहले उत्तराखंड के पूर्व कांग्रेस मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी और हरक सिंह रावत ने भी सराहना की थी। दीपक ने कहा, “मैं एक साधारण व्यक्ति हूं। मैं न तो हिंदू, न मुसलमान, न सिख और न ईसाई हूं। मेरा उद्देश्य केवल इंसानियत के लिए खड़ा होना था।”

वहीं, दुकान के मालिक वकील अहमद ने बताया कि उनकी दुकान करीब 30 साल से इसी नाम से चल रही है और ‘बाबा’ शब्द सभी धर्मों में प्रयुक्त होता है, केवल हिंदू धर्म तक सीमित नहीं है।

उत्तराखंड की यह घटना आपसी भाईचारे और सहिष्णुता का प्रतीक बनकर पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई है।

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