
गुरुग्राम, 7 फरवरी 2026: सिविल सेवा में करियर बनाने का सपना रखने वालों के लिए संगीता राघव की कहानी प्रेरणादायक साबित हो सकती है। हरियाणा की इस बेटी ने UPPCS परीक्षा में टॉप-2 रैंक हासिल कर SDM बनने का सपना साकार किया। उन्होंने SDM बनने की जिद में PhD छोड़ दी और रोजाना 8–10 घंटे पढ़ाई करके यह उपलब्धि हासिल की।
शुरुआत में मिली असफलता, फिर मेहनत ने दिखाई राह:
संगीता ने UPPCS की तैयारी की शुरुआत 5–6 घंटे पढ़ाई से की थी। 2017 में पहली बार परीक्षा देने पर असफलता मिली। लेकिन हार नहीं मानी और अपनी पढ़ाई की अवधि बढ़ाकर 8–10 घंटे रोजाना करने लगीं। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें 2018 में टॉप-2 रैंक दिलाई।
SDM बनने की जिद ने PhD छोड़ी:
सिविल सेवा की तैयारी के दौरान संगीता ने JNU में पीएचडी प्रोग्राम छोड़ दिया। उनका उद्देश्य स्पष्ट था—SDM बनना। उन्होंने साउथ एशियन इंस्टीट्यूट और वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट में काम किया और स्कॉलरशिप का लाभ उठाकर अपनी पढ़ाई और रिसर्च को मजबूत किया।
शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि:
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बैचलर्स की पढ़ाई गुरुग्राम से पूरी की।
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मास्टर्स डिग्री दिल्ली की इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से।
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पिता इंडियन नेवी से रिटायर्ड ऑफिसर, माता गृहिणी।
संगीता का पारिवारिक और शैक्षिक बैकग्राउंड उन्हें शुरुआती समय से ही अनुशासन और मेहनत का पाठ पढ़ा चुका था।
सफलता की कहानी:
संगीता की कहानी बताती है कि अगर सपना बड़ा हो और मेहनत सही दिशा में हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं। उनकी लगन और दृढ़ निश्चय ने उन्हें यूपीपीएससी में टॉप रैंक और SDM का पद दिलाया।