
नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीर पंजाल क्षेत्र को लेकर गत दिनों जमकर हंगामा हुआ। भाजपा विधायक सुनील शर्मा द्वारा की गई टिप्पणी ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ-साथ विपक्षी भाजपा के बीच विवाद और तेज कर दिया। यह मामला राजौरी-पुंछ जिलों को पीर पंजाल और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ जिलों को चेनाब क्षेत्र कहे जाने को लेकर पैदा हुआ।
पीर पंजाल क्षेत्र क्या है?
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पीर पंजाल पर्वतमाला उत्तरी भारत के पश्चिमी हिमालय में स्थित है।
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यह ब्यास और नीलम-किशनगंगा नदियों के बीच दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम की ओर फैला है।
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उत्तर-पश्चिमी छोर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) तक जाता है।
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राजनीतिक दृष्टि से, राजौरी-पुंछ को पीर पंजाल और रामबन-डोडा-किश्तवाड़ को चेनाब क्षेत्र कहा जाता है।
विवाद का कारण:
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भाजपा विधायक सुनील शर्मा ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी पीर पंजाल में स्थापित करने की मांग पर कहा, “मुझे नहीं पता कि यह पीर पंजाल खित्ता कौन सा है।”
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इस बयान के बाद विधानसभा में हंगामा मच गया। भाजपा विधायकों ने इसे क्षेत्रीय साजिश बताते हुए विरोध किया।
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कांग्रेस और सत्तारूढ़ विधायकों ने भाजपा से माफी मांगने की अपील की, लेकिन शर्मा ने इनकार कर दिया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि:
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यह विवाद तब उभरा जब पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राजौरी और पुंछ के साथ-साथ चेनाब घाटी के जिलों को मिलाकर अलग प्रशासनिक प्रभाग बनाने की मांग की थी।
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उन्होंने दूरस्थता, पहाड़ी भूभाग और बुनियादी ढांचे की कमी का हवाला दिया। भाजपा ने इस मांग का विरोध किया।
स्थानीय लोगों की आपत्ति:
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राजौरी और पुंछ के लोग विकास और प्रशासनिक ध्यान में अनदेखी का आरोप लगाते हैं।
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सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण सुरक्षा बलों के बलिदानों और क्षेत्रीय भावनाओं का अपमान होने का भी डर है।
भाजपा का रुख:
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सुनील शर्मा का कहना है कि पीर पंजाल नाम किसी भी शब्दकोश में नहीं है और यह शब्द क्षेत्रीय दलों की राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
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भाजपा इस मामले में ‘ग्रेटर कश्मीर’ की अवधारणा स्वीकार नहीं करती।
सत्तारूढ़ दलों की मांग:
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उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी और वन मंत्री जावेद राणा सहित राजौरी-पुंछ के विधायक माफी की मांग कर चुके हैं।
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निर्दलीय विधायक मुजफ्फर इकबाल खान ने कहा कि शर्मा के बयान से न केवल पीर पंजाल का, बल्कि चेनाब घाटी के किश्तवाड़ और डोडा जिलों का भी अपमान हुआ।