अयोध्या: आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एनडी यूनिवर्सिटी), अयोध्या के सब्जी विज्ञान विभाग ने ‘चप्पन कद्दू’ नामक विलायती कद्दू की एक नई और उन्नत प्रजाति विकसित की है। यह प्रजाति कैंसर रोधी गुणों से भरपूर होने के साथ-साथ कम क्षेत्र में और ऑफ-सीजन में उत्पादन कर किसानों की आर्थिक आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।
यूनिवर्सिटी ने इस नई किस्म को इस साल सब्जी किस्म रिलीज कमेटी (SVRC) से अनुमोदन दिलाकर पूर्वांचल में प्रमुख सब्जी के रूप में उपलब्ध कराने की तैयारी शुरू कर दी है।
सब्जी विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. आस्तिक झा के अनुसार, चप्पन कद्दू सामान्य कद्दू से बिल्कुल अलग है। यह लता विहीन होता है और केवल डेढ़ फुट क्षेत्र में फैलता है। एक पौधे में 4 से 5 फल लगते हैं, जिनका वजन लगभग एक-एक किलो तक होता है। इसके लंबे आकार के फल बाजार में अधिक मांग वाले हैं।
डॉ. झा ने बताया कि इस कद्दू में पोटैशियम, फॉस्फोरस, आयरन, विटामिन-A और विटामिन-C प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को कई गंभीर बीमारियों से बचाने में सहायक हैं।
चप्पन कद्दू की बुवाई अक्टूबर महीने में होती है और यह 70 दिनों में फल देना शुरू कर देता है। सर्दियों के समय, जब आमतौर पर कद्दू जैसी सब्जियां बाजार में नहीं मिलतीं, यह किस्म किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित होगी। कम क्षेत्र में अधिक उपज मिलने से किसानों को अधिक लाभ होगा।
डॉ. झा ने बताया कि इस प्रजाति पर पिछले तीन वर्षों से शोध कार्य चल रहा है। अब तक लगभग 50 उन्नत जर्मप्लाज्म लाइनें विकसित की जा चुकी हैं, जिनमें फलों की संख्या अधिक, उपज बेहतर और फल विभिन्न रंगों में पाए जाते हैं।
डॉ. झा का फोकस नई सब्जी प्रजातियों के विकास पर है। फिलहाल उनके शोध में केरल की क्लोव बीम और पंखी सेम शामिल हैं, जिनमें हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों में औषधीय गुण पाए जाते हैं।