Tuesday, June 16

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एम्स भोपाल ने रचा इतिहास: 55 वर्षीय मरीज को मिली पैरालिसिस से मुक्ति, जांघ की नस से लौटा हाथ का मूवमेंट

भोपाल: राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) भोपाल ने चिकित्सा जगत में नई मिसाल पेश की है। संस्थान के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने प्रदेश में पहली बार जटिल ‘फ्री फंक्शनिंग मसल ट्रांसफर’ सर्जरी सफलतापूर्वक की, जिससे 55 वर्षीय मरीज के लकवाग्रस्त हाथ की कोहनी की गति वापस लौट आई।

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सर्जरी की चुनौती
मरीज को पैन ब्रैकियल प्लेक्सस इंजरी थी, जो एक गंभीर स्थिति है जिसमें हाथ की नसें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और हाथ लकवाग्रस्त हो जाता है। मरीज अपनी दैनिक गतिविधियां भी नहीं कर पा रहा था।

ऐसे हुई जटिल सर्जरी
डॉक्टरों ने माइक्रोसर्जिकल तकनीक का उपयोग करते हुए मरीज की जांघ से ‘ग्रैसिलिस’ मांसपेशी को नसों और रक्त वाहिकाओं सहित निकाला और उसे प्रभावित हाथ में प्रत्यारोपित किया। इस प्रक्रिया में माइक्रोवैस्कुलर और तंत्रिका एनास्टोमोसिस की गई, ताकि मांसपेशी को नई जगह पर रक्त और संकेत मिल सकें।

डॉक्टरों की भूमिका
सर्जरी का नेतृत्व डॉ. दीपक कृष्णा और डॉ. राहुल दुबेपुरिया ने किया, जबकि एनेस्थीसिया टीम का नेतृत्व डॉ. अनुज जैन ने संभाला। एम्स प्रशासन के अनुसार, मरीज की स्थिति संतोषजनक है और शुरुआती परिणाम उत्साहजनक हैं। फिलहाल मरीज कुछ दिनों तक डॉक्टरों की निगरानी में रहेंगे।

यह सर्जरी चिकित्सा विज्ञान में माइक्रोसर्जरी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुई है और प्रदेश में इससे कई मरीजों को नई उम्मीद मिली है।

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