Saturday, February 7

भारत-अमेरिका ट्रेड डील: पशु चारा, जेनेरिक दवाएं, वाइन… अब अमेरिका से क्या खरीदेगा भारत और क्या बेचेगा?

नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चर्चा में रही अंतरिम ट्रेड डील (Interim Trade Deal) पर अब अंतिम मुहर लग चुकी है। दोनों देशों ने शुक्रवार को एक अंतरिम व्यापार ढांचा (Interim Trade Framework) पेश किया, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य टैरिफ में कटौती, ऊर्जा सहयोग बढ़ाना और सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना है।

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सरकारी अधिकारियों के अनुसार यह समझौता आगे चलकर US-India Bilateral Trade Agreement (BTA) की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसकी बातचीत फरवरी 2025 से जारी थी। इस डील से दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलित होने के साथ-साथ निवेश और निर्यात को भी गति मिलने की उम्मीद है।

भारत की ओर से टैरिफ में कटौती का वादा

इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाले कई उत्पादों पर शुल्क खत्म करने या कम करने का फैसला किया है। खास तौर पर अमेरिका के औद्योगिक और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में ज्यादा आसानी से प्रवेश देने पर सहमति बनी है।

इन अमेरिकी उत्पादों पर भारत घटाएगा शुल्क

भारत जिन कृषि और खाद्य उत्पादों पर टैरिफ कम करेगा, उनमें शामिल हैं—

  • सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs)

  • पशुओं के चारे के लिए लाल ज्वार

  • मेवे और फल

  • सोयाबीन तेल

  • वाइन और स्पिरिट (शराब)

  • अन्य फूड प्रोडक्ट

इसके अलावा, कई औद्योगिक वस्तुओं पर भी शुल्क घटाने या खत्म करने की बात कही गई है।

अमेरिका की तरफ से भारतीय उत्पादों पर बड़ी राहत

डील के तहत अमेरिका ने भारत के लिए सबसे बड़ा फैसला लेते हुए 50% तक के दंडात्मक टैरिफ को घटाकर 18% करने पर सहमति जताई है। इससे भारत के निर्यातकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

इन भारतीय सेक्टर को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा

अमेरिका में जिन भारतीय उत्पादों को टैरिफ में राहत मिलेगी, उनमें प्रमुख हैं—

  • टेक्सटाइल और कपड़े

  • चमड़ा और उससे बने उत्पाद

  • जूते

  • प्लास्टिक और रबर उत्पाद

  • ऑर्गेनिक केमिकल्स

  • होम डेकोर और हैंडीक्राफ्ट

  • कुछ खास मशीनरी और इंजीनियरिंग सामान

जेनेरिक दवाओं और रत्न-हीरे पर भी राहत

इस समझौते में कुछ प्रमुख उत्पादों पर विशेष रियायत दी गई है। अमेरिका ने संकेत दिया है कि—

  • जेनेरिक दवाओं

  • रत्न और हीरे

  • विमान और विमान के पुर्जे

जैसे उत्पादों पर टैरिफ में बड़ी छूट या राहत मिलेगी। इससे भारत के फार्मा और जेम्स-ज्वेलरी सेक्टर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूती मिलेगी।

सेक्शन 232 टैरिफ पर भी समाधान

अमेरिका द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत लगाए जाने वाले Section 232 Tariff को लेकर भी समझौते में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।

इसके तहत—

  • भारत से आने वाले विमानों और विमान के पुर्जों पर स्टील, एल्युमीनियम और तांबे से जुड़े कुछ टैरिफ हटाए जाएंगे।

  • भारत को ऑटो पार्ट्स के लिए खास दर पर कोटा दिया जाएगा।

  • दवाओं पर टैरिफ की समीक्षा भी अमेरिका की चल रही जांच के आधार पर की जाएगी।

गैर-टैरिफ बाधाएं हटाने पर सहमति

भारत ने अमेरिका के साथ यह भी सहमति जताई है कि वह उन पुराने नियमों और प्रक्रियाओं को आसान बनाएगा, जो अमेरिकी सामानों के आयात में बाधा बनते थे।

इसमें शामिल हैं—

  • मेडिकल डिवाइस

  • ICT (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) उपकरण

  • खाद्य और कृषि उत्पाद

दोनों देश अगले 6 महीनों में अंतरराष्ट्रीय मानकों और टेस्टिंग नियमों को मान्यता देने को लेकर भी बातचीत करेंगे, जिससे व्यापार और तेज हो सके।

डिजिटल ट्रेड और सप्लाई चेन को मिलेगा बढ़ावा

समझौते में डिजिटल व्यापार को लेकर भी अहम पहल की गई है। दोनों देश डिजिटल ट्रेड से जुड़ी अड़चनों को दूर करने और भविष्य में पूर्ण BTA के तहत स्पष्ट नियम बनाने पर सहमत हुए हैं।

इसके साथ ही सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि वैश्विक संकट के समय व्यापार प्रभावित न हो।

भारत 5 साल में अमेरिका से खरीदेगा 500 अरब डॉलर का सामान

इस डील की सबसे बड़ी बात यह है कि भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर तक के उत्पाद खरीदने की योजना पर काम करेगा।

भारत किन चीजों की बड़ी खरीद करेगा

  • ऊर्जा उत्पाद

  • विमान और विमान के पुर्जे

  • कीमती धातुएं

  • टेक्नोलॉजी उत्पाद

  • कोकिंग कोल

  • GPUs और डेटा सेंटर उपकरण

इससे टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्र में भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष: भारत-अमेरिका व्यापार में नई शुरुआत

भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड डील को दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों के लिए एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इससे जहां भारत को अमेरिका के बड़े बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं अमेरिका के कृषि और औद्योगिक उत्पादों को भारतीय बाजार में नई संभावनाएं मिलेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता आने वाले समय में भारत के निर्यात, निवेश और रोजगार सृजन को नई दिशा दे सकता है।

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