Saturday, February 7

RBI Monetary Policy 2026: रेपो रेट में बदलाव क्यों नहीं हुआ? अमेरिका-भारत ट्रेड डील से कनेक्शन समझिए

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी मौद्रिक नीति (Monetary Policy) की समीक्षा करते हुए बड़ा फैसला लिया। केंद्रीय बैंक ने इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया और इसे 5.25 फीसदी पर स्थिर बनाए रखा। इसके साथ ही आरबीआई ने अपना मॉनेटरी स्टांस भी ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है।

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यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब भारत ने हाल ही में अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) के साथ अहम व्यापार समझौते किए हैं। खासतौर पर अमेरिका के साथ ट्रेड डील के बाद टैरिफ दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब आर्थिक माहौल सकारात्मक दिख रहा है, तो RBI ने ब्याज दरों में कटौती या बढ़ोतरी क्यों नहीं की?

अमेरिका-भारत डील से कम हुआ टैरिफ दबाव

इस हफ्ते की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच एक अहम समझौते पर सहमति बन गई है। इसके तहत भारतीय सामानों पर लगने वाला अमेरिकी टैरिफ 50% से घटाकर 18% किए जाने का प्रावधान है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस डील से भारत के निर्यात को राहत मिलेगी और अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव कम होगा। यही कारण है कि RBI को तत्काल ब्याज दरों में बदलाव करने की जरूरत नहीं पड़ी।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने क्या कहा?

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पॉलिसी स्टेटमेंट में कहा कि वैश्विक स्तर पर बाहरी चुनौतियां जरूर बढ़ी हैं, लेकिन अमेरिका के साथ व्यापार समझौते का सफल समापन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।

उन्होंने बताया कि महंगाई नियंत्रण में है और आगे भी इसका आउटलुक नरम बना हुआ है।

गवर्नर ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ और कम महंगाई के साथ अच्छी स्थिति में है।

महंगाई नियंत्रण में, इसलिए कटौती की जरूरत नहीं

आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया कि महंगाई फिलहाल टॉलरेंस बैंड से नीचे बनी हुई है। हाई-फ्रीक्वेंसी इंडिकेटर्स भी संकेत दे रहे हैं कि 2025-26 की तीसरी तिमाही और उसके बाद भी ग्रोथ मोमेंटम मजबूत बना रह सकता है।

ऐसे में RBI का मानना है कि अभी के लिए ब्याज दरों में बदलाव करने की बजाय स्थिर नीति ज्यादा उपयुक्त है।

EU डील ने भी बढ़ाया भरोसा

संजय मल्होत्रा ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ के साथ ऐतिहासिक ट्रेड डील और अमेरिका के साथ समझौते से भारत की ग्रोथ को लंबे समय तक मजबूती मिलने की संभावना है।

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि वैश्विक स्तर पर बढ़ते व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक टकराव दुनिया की आर्थिक व्यवस्था के लिए चुनौती बन सकते हैं।

एक्सपर्ट्स कैसे देख रहे हैं RBI का फैसला?

एचडीएफसी बैंक की प्रिंसिपल इकोनॉमिस्ट साक्षी गुप्ता ने कहा कि आगे चलकर रेपो रेट पर लंबे समय तक विराम देखने को मिल सकता है। उनके मुताबिक 5.25% को अब टर्मिनल रेट माना जा सकता है।

वहीं, एलारा सिक्योरिटीज की इकोनॉमिस्ट गरिमा कपूर ने कहा कि पहले किए गए रेट कट का असर अभी पूरी तरह ट्रांसमिट होना बाकी है। ऐसे में आरबीआई ने अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को देखते हुए रेपो रेट को स्थिर रखना बेहतर समझा।

उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य कीमतों के सामान्य होने और बेस इफेक्ट के चलते आगे महंगाई बढ़ सकती है, जिससे भविष्य में रेट कट की गुंजाइश सीमित हो सकती है।

निष्कर्ष: RBI का फोकस स्थिरता पर

कुल मिलाकर RBI ने रेपो रेट में बदलाव इसलिए नहीं किया क्योंकि—

  • ग्रोथ मजबूत बनी हुई है

  • महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है

  • अमेरिका और EU डील से बाहरी दबाव घटा है

  • पहले के रेट कट का प्रभाव अभी पूरी तरह दिखना बाकी है

  • वैश्विक अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है

आरबीआई ने संकेत दिया है कि फिलहाल नीति में स्थिरता बनाए रखना ही सबसे बेहतर रणनीति है और आने वाले महीनों में दरों को लेकर बड़ा बदलाव होने की संभावना कम है।

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