
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के हजरतगंज थाने में वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। यह मामला किसी सामान्य नागरिक ने नहीं बल्कि थाने में तैनात इंस्पेक्टर विक्रम सिंह ने खुद वादी बनकर दर्ज कराया। उन्होंने समाज में बढ़ते आक्रोश और अपमानजनक शब्दावली का संज्ञान लेते हुए यह कदम उठाया।
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह कौन हैं?
46 वर्षीय विक्रम सिंह 2001 बैच के सब-इंस्पेक्टर हैं। वर्तमान में वे हजरतगंज थाने में तैनात हैं। इससे पहले वे कृष्णानगर थाने, वाराणसी और झांसी क्राइम ब्रांच, साइबर सेल मैनपुरी और अयोध्या एसओ के पद पर काम कर चुके हैं। उनका ट्रांसफर 10 अक्टूबर 2022 को लखनऊ जिले में हुआ था।
वे बेहतर पुलिसिंग और लोगों के प्रति करुणा के लिए भी जाने जाते हैं। जुलाई 2023 में कृष्णानगर में एक 80 वर्षीय वृद्धा के अंतिम संस्कार में उनकी मानवीय पहल चर्चा में आई थी। इसके अलावा बच्चों के बीच पुलिस की छवि सुधारने के लिए उन्होंने हजरतगंज थाने में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए, जिसमें बच्चों को थाने में बुलाकर कुर्सी पर बैठाया गया और मिठाई–टॉफी वितरित की गई।
सम्मान और पुरस्कार:
डीजीपी राजीव कृष्ण ने दिसंबर 2025 में इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्य और हजरतगंज के हाई-सिक्योरिटी जोन की कमान संभालने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।
केस की धाराएँ और आरोप:
लखनऊ पुलिस ने वेब सीरीज के निर्देशक और टीम के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की है। इनमें शामिल हैं:
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धारा 196 IPC: जाति और धर्म के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच नफरत फैलाना
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धारा 299 IPC: किसी वर्ग की धार्मिक और जातिगत भावनाओं को जानबूझकर आहत करना
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धारा 352 & 353 IPC: सार्वजनिक शांति भंग करने के इरादे से अपमानजनक कृत्य
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धारा 66 IT Act: डिजिटल प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करना
शिकायत का आधार:
इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के मुताबिक, वेब सीरीज का शीर्षक और भाषा एक विशिष्ट समुदाय को अपमानित करने के उद्देश्य से रखी गई है। यह न केवल जातिगत विद्वेष पैदा करता है बल्कि समाज के बड़े वर्ग की छवि को भी धूमिल करता है। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी की आस्था या सामाजिक पहचान पर चोट पहुंचाना गलत है।