Friday, February 6

हाजीपुर सदर अस्पताल में नवजात अदला-बदली का आरोप, परिजनों का हंगामा, डॉक्टर-नर्स फरार

हाजीपुर (वैशाली)। बिहार के वैशाली जिले स्थित हाजीपुर सदर अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रसव के बाद नवजात बच्चे की अदला-बदली को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि ओटी वार्ड में मौजूद डॉक्टर और नर्स सहित कई कर्मचारी अस्पताल छोड़कर फरार हो गए।

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घटना की सूचना मिलते ही नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

ऑपरेशन के बाद बताया गया बेटा, फिर सौंप दी गई बेटी

जानकारी के अनुसार, गोरौल थाना क्षेत्र के इस्लामपुर निवासी धीरज कुमार की पत्नी गुंजन को प्रसव के लिए हाजीपुर सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोपहर करीब 12 बजे उन्हें ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया।

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने उन्हें बताया कि गुंजन ने बेटे को जन्म दिया है। इस खबर के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन कुछ ही देर बाद मामला विवाद में बदल गया।

“बेटे की सूचना पर नसबंदी कराई, फिर बेटी थमा दी”

पीड़िता गुंजन के भाई संजय कुमार ने आरोप लगाया कि गुंजन की पहले से एक चार साल की बेटी है। बेटे के जन्म की जानकारी मिलने के बाद परिवार ने डॉक्टरों की सलाह पर नसबंदी कराने की सहमति भी दे दी।

लेकिन लगभग एक घंटे बाद जब अस्पताल कर्मियों ने नवजात को कपड़े में लपेटकर सौंपा, तो वह बेटा नहीं बल्कि बेटी थी। इसके बाद परिजनों ने नवजात को लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल पर बच्चा बदलने का आरोप लगाते हुए जोरदार हंगामा शुरू कर दिया।

हंगामा बढ़ते ही डॉक्टर और नर्स वार्ड छोड़कर भागे

परिजनों के आक्रोश और बढ़ते हंगामे को देखते हुए ओटी वार्ड में तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी अचानक वार्ड छोड़कर चले गए। अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

स्थिति बिगड़ने पर नगर थाना पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले को शांत कराने के साथ जांच शुरू की।

सिविल सर्जन ने किया दावा: “प्रसूता ने बेटी को ही जन्म दिया”

इस पूरे विवाद पर सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने कहा कि प्रसूता ने बेटी को ही जन्म दिया है

उन्होंने स्पष्ट किया कि परिजनों को बेटे के जन्म की जानकारी किसने दी, यह अब तक स्पष्ट नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए एक टीम का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस और प्रशासन जांच में जुटा

फिलहाल पुलिस अस्पताल के रिकॉर्ड, स्टाफ की भूमिका और प्रसव प्रक्रिया से जुड़े सभी तथ्यों की जांच कर रही है। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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