Friday, February 6

बिहार में CBI जांच पर फिर उठे सवाल, पटना NEET छात्रा मौत केस से गरमाई राजनीति

पटना। बिहार की राजधानी पटना में नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। निजी हॉस्टल में रह रही छात्रा की मौत के बाद जहां आम लोग न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं, वहीं अब इस मामले की जांच को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

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घटना के बाद लगातार विरोध प्रदर्शन, कैंडल मार्च और सामाजिक संगठनों के दबाव के बीच बिहार सरकार ने इस केस में सीबीआई (CBI) जांच की सिफारिश कर दी है। सरकार का दावा है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन पीड़िता के परिजन इस फैसले से संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं।

परिजनों ने जताई नाराजगी, न्यायिक जांच की थी मांग

मृत छात्रा के परिवार ने पहले ही स्पष्ट किया था कि वे CBI जांच नहीं चाहते, बल्कि न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि वे चाहते हैं कि पूरे मामले की जांच कोर्ट की निगरानी में हो, ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही या दबाव की गुंजाइश न रहे।

हालांकि सरकार ने परिजनों की मांग को दरकिनार करते हुए मामले को CBI को सौंपने का फैसला किया, जिसके बाद बिहार में सीबीआई की कार्यशैली और पुराने मामलों के रिकॉर्ड को लेकर बहस शुरू हो गई है।

CBI का बिहार में ट्रैक रिकॉर्ड सवालों के घेरे में

बिहार में CBI ने कई बड़े और हाई-प्रोफाइल मामलों की जांच की है, लेकिन इनमें से कई केस आज भी लंबे समय से अधूरे हैं या फिर न्यायिक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सके। ऐसे में पटना NEET छात्रा मौत मामले में CBI जांच को लेकर लोगों में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

सृजन घोटाला: 1000 करोड़ से ज्यादा का मामला, जांच अभी भी अधूरी

2017 में सामने आया सृजन घोटाला बिहार के सबसे बड़े आर्थिक घोटालों में गिना जाता है। इस मामले में सरकारी फंड को भागलपुर स्थित एक NGO सृजन महिला विकास सहयोग समिति (SMVSS) को धोखाधड़ी से ट्रांसफर किए जाने का आरोप था।

बताया जाता है कि यह घोटाला 2004 से 2014 के बीच विभिन्न सरकारी योजनाओं के पैसे की हेराफेरी से जुड़ा था और इसका अनुमानित आंकड़ा 1000 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया।

मामला CBI को सौंपा गया, कई गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन वर्षों बाद भी यह जांच अंजाम तक नहीं पहुंच पाई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) भी मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच में शामिल है, लेकिन केस अब भी अधूरा माना जा रहा है।

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामला: दोषी सजा पाए, फिर भी जांच पर सवाल

2018 में सामने आया मुजफ्फरपुर शेल्टर होम केस पूरे देश को शर्मसार करने वाला मामला था। इसमें सरकारी शेल्टर होम में कई नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न की बात सामने आई थी।

टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) की रिपोर्ट के बाद मामला उजागर हुआ और CBI ने जांच की। मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर सहित कई अन्य को अदालत ने दोषी ठहराया और सजा भी सुनाई।

हालांकि विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने यह आरोप लगाया कि जांच के दौरान कई प्रभावशाली लोगों की भूमिका सामने आने के बावजूद उन्हें बचा लिया गया।

नवरुणा अपहरण केस: 13 साल बाद भी नहीं मिला जवाब

2012 में मुजफ्फरपुर से 12 वर्षीय बच्ची नवरुणा के अपहरण का मामला बिहार के सबसे चर्चित और रहस्यमय मामलों में शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच CBI को सौंपी गई।

लेकिन 13 साल बीत जाने के बावजूद CBI इस मामले में किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई। शुरुआत में लैंड माफिया से जुड़े लोगों पर शक जताया गया, लेकिन बाद में CBI ने सबूतों की कमी का हवाला देते हुए केस बंद करने की कोशिश की, जिसका पीड़ित परिवार ने कड़ा विरोध किया।

खुशी अपहरण मामला: 5 साल बाद भी बच्ची का सुराग नहीं

इसी तरह 2021 में मुजफ्फरपुर के सरस्वती पूजा पंडाल से 5 वर्षीय बच्ची खुशी के अपहरण का मामला भी आज तक सुलझ नहीं सका।

स्थानीय पुलिस के असफल रहने के बाद केस CBI को सौंपा गया। जांच में पॉलीग्राफ टेस्ट, फोरेंसिक जांच और कई संदिग्धों से पूछताछ की गई, लेकिन पांच साल से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी बच्ची का पता नहीं चल पाया।

पटना NEET छात्रा मौत केस में CBI जांच पर जनता में संशय

इन तमाम मामलों के अनुभवों को देखते हुए अब पटना में NEET छात्रा की मौत के केस में CBI जांच को लेकर आम लोगों के मन में संदेह पैदा हो गया है।

लोगों का सवाल है कि जब कई हाई-प्रोफाइल मामलों में CBI वर्षों बाद भी नतीजे तक नहीं पहुंच पाई, तो क्या इस मामले में पीड़िता को जल्द न्याय मिल पाएगा?

सरकार का दावा: निष्पक्ष जांच होगी, राजनीति तेज

वहीं राज्य सरकार का कहना है कि CBI जांच से सच्चाई सामने आएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर विपक्षी दल इसे राजनीतिक कदम बताकर सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

मामला अब सिर्फ एक छात्रा की मौत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार में कानून-व्यवस्था और जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता को लेकर बड़ी बहस का मुद्दा बनता जा रहा है।

निष्कर्ष

पटना NEET छात्रा मौत मामले में CBI जांच की घोषणा के बाद उम्मीद और आशंका दोनों साथ चल रही हैं। जनता और पीड़ित परिवार की सबसे बड़ी मांग यही है कि जांच तेज, निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि छात्रा को न्याय मिल सके और दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।

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