
मुंबई/पुणे: मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर मंगलवार शाम को भोर घाट खंड में प्रोपलीन गैस से भरा टैंकर पलटने के बाद लगभग 32 घंटे तक यातायात ठप रहा। इस हादसे में हजारों यात्री फंस गए, जिनमें छोटे बच्चे, बुजुर्ग और इलाज के लिए मुंबई जा रहे मरीज शामिल थे।
कैसे हुआ जाम
अधिकारियों के अनुसार, टैंकर चालक सुरंग के पास ढलान पर वाहन की गति नियंत्रित नहीं कर सका। टैंकर पलटते ही तीन वाल्व क्षतिग्रस्त हो गए और गैस रिसाव शुरू हो गया। सुरक्षा कारणों से दोनों दिशाओं में आवाजाही बंद कर दी गई। NDRF, फायर ब्रिगेड, राज्य आपदा प्रबंधन और तेल कंपनी के अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन रिसाव को तुरंत बंद नहीं किया जा सका। गैस को सुरक्षित टैंकर में स्थानांतरित करने के बाद ही मार्ग खोला जा सका।
जाम में फंसे लोगों की दिक्कतें
जाम में फंसे यात्रियों ने रातभर गाड़ियों में ही इंतजार किया। खाने-पीने और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। 57 वर्षीय सुनिता पाटिल कई घंटे अपनी कार में फंसी रहीं। एक यात्री अपने कैंसर पीड़ित मित्र को मुंबई इलाज के लिए ले जा रहा था, लेकिन वह समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सका।
सोशल मीडिया से मिली मदद
कई यात्रियों ने सोशल मीडिया से जानकारी लेकर अपने मार्ग बदले। वसीम जोद ने उर्से टोल प्लाजा के पास फ़ूड मॉल से यूटर्न लेकर पुणे लौटने की यात्रा पूरी की। कुछ लोगों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी।
32 घंटे की घटनाओं का क्रम
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मंगलवार 4:45 बजे: भोर घाट खंड में टैंकर पलटा, गैस रिसाव शुरू।
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शाम 5:00–6:00 बजे: मुंबई की ओर यातायात पूरी तरह रोका गया, पुणे की लेन भी बंद।
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शाम 7:00 बजे: एक्सप्रेसवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम।
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रात 9:00 बजे: NDRF, फायर ब्रिगेड, हाईवे पुलिस और राज्य आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं।
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पूरी रात: एक्सप्रेसवे बंद, यात्री गाड़ियों में ही फंसे।
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बुधवार दोपहर 12:00 बजे: गैस को दूसरे टैंकर में स्थानांतरित करने की तैयारी शुरू।
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शाम 6:00 बजे: डी-कंटेनमेंट प्रक्रिया तेज की गई।
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रात 10:30 बजे: गैस को सुरक्षित रूप से ट्रांसफर किया गया।
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रात 11:30 बजे: टैंकर ठंडा किया गया और क्रेन से हटाया गया।
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देर रात 1:46 बजे: यातायात बहाल।
इस भयंकर जाम ने न केवल यात्रियों की परेशानियां बढ़ाई, बल्कि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को भी प्रभावित किया। MSRTC की 139 बसें रद्द, निजी बस ऑपरेटरों और रेलवे सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।