
वित्तीय आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए पटना नगर निगम अप्रैल में 200 करोड़ रुपए जुटाने के लिए म्युनिसिपल बॉन्ड जारी करेगा। इस राशि का उपयोग शहर की जलापूर्ति, सड़क निर्माण और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में किया जाएगा। इस बॉन्ड को अगस्त तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध किया जाएगा।
नगर आयुक्त यशपाल मीणा के अनुसार, 30 लाख की आबादी को बेहतर नागरिक सेवाएं देने के लिए निगम अब केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर नहीं रहेगा और खुद फंड जुटाएगा। पटना यह कदम उठाने वाला बिहार का पहला नगर निकाय बन रहा है।
बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया:
बॉन्ड निर्गमन के लिए नगर निगम को राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। इसके लिए निगम की वित्तीय स्थिति का गहन मूल्यांकन और ऑडिटेड बैलेंस शीट प्रस्तुत करना अनिवार्य है। बॉन्ड जारी होने से पहले SEBI से मान्यता प्राप्त एजेंसी द्वारा क्रेडिट रेटिंग कराना जरूरी है, जिसमें आम तौर पर ‘A’ या उससे उच्च रेटिंग मानक मानी जाती है। इसके बाद बॉन्ड की कुल राशि, ब्याज दर, परिपक्वता अवधि और टैक्स की स्थिति तय की जाती है।
बॉन्ड निर्गम समिति:
नगर आयुक्त की अध्यक्षता में गठित ‘बॉन्ड निर्गम समिति’ बॉन्ड के स्वरूप, रेटिंग एजेंसियों के समझौते और जारी करने की शर्तों को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी संभालेगी। 7 फरवरी को होने वाली निगम परिषद की बैठक में इसे मुख्य एजेंडे के रूप में शामिल किया गया है।
भारत में म्युनिसिपल बॉन्ड की शुरुआत बेंगलुरु नगर निगम द्वारा की गई थी और यह नगर निकायों के लिए आधुनिक वित्तीय मॉडल के रूप में स्थापित हुआ।