
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ को नए सिरे से खड़ा करने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी के भीतर उभरे संकट और नेतृत्व पर उठते सवालों के बीच किशोर ने जमीनी स्तर पर सक्रिय होने का फैसला लिया है। वे 8 फरवरी से राज्यव्यापी दौरे पर निकलेंगे, जिसका उद्देश्य संगठन का पुनर्गठन और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना है।
अकेले दम पर सभी सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी थी। नतीजों के बाद कई प्रमुख नेताओं के किनारा करने और संगठन में असंतोष बढ़ने की खबरें सामने आई थीं। ऐसे समय में प्रशांत किशोर का यह दौरा पार्टी के अस्तित्व और भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
पश्चिम चंपारण से शुरुआत
यात्रा की शुरुआत 8 फरवरी को पश्चिम चंपारण के बगहा से होगी। पहले चरण का कार्यक्रम 13 फरवरी तक तय किया गया है। इस दौरान वे बेतिया, मोतिहारी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और वैशाली का दौरा करेंगे। इन जिलों में कार्यकर्ताओं के साथ बैठक कर नए संगठनात्मक ढांचे की घोषणा की जाएगी।
‘क्विक एक्शन’ मॉडल पर जोर
पार्टी की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, जिस जिले में बैठक होगी, उसके तीन दिन के भीतर जिला इकाई के नए संगठन की घोषणा कर दी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में यह प्रक्रिया पूरी होगी। पार्टी इसे ‘क्विक एक्शन’ मॉडल बता रही है, जिसके तहत खाली पदों को भरकर सक्रिय कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अंदरूनी असंतोष पर लगाम की कोशिश
चुनावी हार के बाद पार्टी में मची भगदड़ को रोकना भी इस दौरे का अहम मकसद बताया जा रहा है। प्रशांत किशोर सीधे जिला इकाइयों से संवाद कर समर्पित कार्यकर्ताओं को भविष्य की रणनीति से जोड़ने की कोशिश करेंगे। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि यह यात्रा संगठन को नया ढांचा देने के साथ-साथ अंदरूनी कलह पर भी नियंत्रण स्थापित करेगी।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह अभियान प्रशांत किशोर के लिए केवल संगठनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक पुनर्स्थापना की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में इस यात्रा का असर पार्टी की दिशा और जनाधार दोनों पर नजर आएगा।