
पटना: नीट परीक्षा की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में पटना पुलिस ने कई अहम खुलासे किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में तकनीकी और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय शर्मा ने बताया कि छात्रावास के सीसीटीवी फुटेज को विशेष फोरेंसिक लैब में जांच के लिए भेजा गया था। लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि फुटेज के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई। फुटेज के अनुसार छात्रा 5 जनवरी को एक सहेली के साथ हॉस्टल लौटी थी और उस रात केवल दो बार संक्षिप्त समय के लिए कमरे से बाहर निकली। इसके बाद वह कमरे में ही रही।
अगली सुबह जब कमरा देर तक बंद रहा तो वार्डन और अन्य छात्राओं की मौजूदगी में गार्ड ने दरवाजा तोड़ा। पुलिस की तकनीकी जांच से यह भी सामने आया है कि छात्रा 27 दिसंबर से 5 जनवरी तक जहानाबाद स्थित अपने घर पर थी। पटना लौटते समय उसने अरवल मोड़ स्थित एक मेडिकल स्टोर से ‘अमिटोन प्लस’ नामक दवा खरीदी थी। यूपीआई लेनदेन रिकॉर्ड और दुकानदार के बयान से इसकी पुष्टि हुई है।
छात्रा को 6 जनवरी से 10 जनवरी तक प्रभात मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी हालत गंभीर बनी रही। अस्पताल की प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण ड्रग ओवरडोज बताया गया है।
हालांकि, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट में छात्रा के अंतर्वस्त्रों पर वीर्य के निशान मिलने से यौन उत्पीड़न की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर एसआईटी और सीबीआई की टीमों ने संभावित संदिग्धों की डीएनए प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जांच के दौरान छात्रा के कमरे से एक निजी डायरी और मोबाइल फोन भी बरामद किया गया। मोबाइल के फोरेंसिक विश्लेषण में पता चला कि छात्रा ने 24 दिसंबर को ऑनलाइन साइनाइड और नींद की गोलियों से संबंधित जानकारी खोजी थी। पुलिस के अनुसार डायरी में दर्ज बातें उसकी मानसिक स्थिति और निजी संघर्षों की ओर संकेत करती हैं, जो सीबीआई जांच के लिए महत्वपूर्ण इनपुट मानी जा रही हैं।
एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई में कदमकुआं के अतिरिक्त थाना प्रभारी और चित्रगुप्त नगर के थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। एसएसपी ने बताया कि सूचना साझा करने में देरी और कर्तव्य में लापरवाही के कारण यह कदम उठाया गया, क्योंकि समय पर कार्रवाई से महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सकता था।
मामले की जांच अब सीबीआई के हवाले है और आगे की कार्रवाई उसी के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।