
गाजियाबाद: टीला मोड़ स्थित भारत सिटी सोसायटी में तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। जांच में सामने आ रही जानकारियाँ यह संकेत दे रही हैं कि बच्चियां लंबे समय से विदेशी डिजिटल कंटेंट, खासकर कोरियन ड्रामा और गेम्स के अत्यधिक प्रभाव में थीं। परिवार और ट्यूटर के बयान इस घटना को केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि बच्चों में बढ़ती डिजिटल निर्भरता की चेतावनी के रूप में सामने ला रहे हैं।
परिजनों के अनुसार, तीनों बहनें नियमित स्कूल नहीं जाती थीं और घर पर पढ़ाई के लिए ट्यूटर लगाया गया था। ट्यूटर ने कुछ ही दिनों में पढ़ाने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि बच्चियां पढ़ाई के दौरान कोरियन भाषा में पढ़ाने की जिद करती थीं और मना करने पर उनका मजाक उड़ाती थीं। इस व्यवहार से वह खुद को असहज महसूस कर रही थीं।
पहचान और व्यवहार में बदलाव
पिता चेतन कुमार का कहना है कि बच्चियां कोरियन पॉप कल्चर से गहराई से प्रभावित थीं। उन्होंने अपने नाम बदल लिए थे और पहनावे से लेकर बोलचाल तक में विदेशी शैली अपनाने लगी थीं। परिवार का दावा है कि वे धीरे-धीरे सामाजिक रूप से अलग-थलग होती जा रही थीं और आपस में ही सीमित बातचीत करती थीं।
पिता की अपील
घटना के बाद पिता ने अन्य अभिभावकों से अपील की है कि बच्चों के मोबाइल उपयोग पर निगरानी रखें और उनके व्यवहार में बदलाव को गंभीरता से लें। उनका कहना है कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि डिजिटल लत इतनी खतरनाक साबित हो सकती है।
डिजिटल लत पर बहस तेज
इस घटना के बाद सोशल मीडिया और समाज में बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों को लेकर बहस तेज हो गई है। अभिनेता सोनू सूद ने भी दुख जताते हुए बच्चों में बढ़ती डिजिटल लत पर चिंता व्यक्त की और ऑनलाइन गेमिंग पर सख्त नियंत्रण की मांग की।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, समस्या तकनीक नहीं बल्कि उसका अनियंत्रित उपयोग है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के साथ खुला संवाद, भावनात्मक समर्थन और स्क्रीन टाइम का संतुलन बेहद जरूरी है। अचानक पाबंदी लगाने के बजाय समझदारी और संवाद से समाधान खोजा जाना चाहिए।