
नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए परेशानी बढ़ सकती है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) पर ब्याज दर में कमी की संभावना है। यह फैसला EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) की मार्च के पहले सप्ताह में होने वाली बैठक में तय किया जाएगा।
मौजूदा रिपोर्टों के मुताबिक, EPF की ब्याज दर 8.25% से घटाकर 8% से 8.20% के बीच कर दी जा सकती है। यह कदम EPFO के घटते कॉर्पस को देखते हुए उठाया जा रहा है।
प्राइवेट सेक्टर कर्मचारियों के लिए EPF एक अनिवार्य बचत योजना है। इसमें कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% योगदान करते हैं, जबकि कंपनी भी समान राशि का योगदान देती है। कंपनी के योगदान में से 8.33% कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में जाता है। EPF अकाउंट में जमा राशि पर सालाना ब्याज दिया जाता है।
EPFO की फाइनेंस, इनवेस्टमेंट और ऑडिट कमेटी फरवरी के अंतिम सप्ताह में निवेश पर रिटर्न के आधार पर ब्याज दर तय करेगी और इसके बाद सिफारिश CBT को भेजी जाएगी। यदि CBT इसे मंजूरी देती है, तो वित्त मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मंजूरी के बाद ही यह आधिकारिक रूप से लागू होगी।
विशेष सूत्रों का कहना है कि पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुड्डुचेरी में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए EPF की ब्याज दर को लगातार तीसरे वर्ष यथावत रखा जा सकता है।
साथ ही, बोर्ड वेज सीलिंग को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने पर भी विचार कर सकता है। वेज सीलिंग का मतलब है वह बेसिक सैलरी, जिस पर कर्मचारियों के लिए EPF में योगदान करना अनिवार्य होता है। मौजूदा नियम के अनुसार, यदि आपकी बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से अधिक है, तो PF कटौती आपकी मर्जी पर निर्भर है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में EPFO को निर्देश दिया था कि वह चार महीने के भीतर इस लिमिट पर विचार करे।
कर्मचारी और विशेषज्ञ मानते हैं कि ब्याज दर में कमी और वेज लिमिट में बदलाव से प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की लंबी अवधि की बचत पर असर पड़ सकता है।