
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 18% तक घटा दिया, जो केवल व्यापारिक रियायत नहीं, बल्कि भारत की बदलती कूटनीतिक स्थिति और वैश्विक शक्ति संतुलन में उसकी केंद्रीय भूमिका का संकेत है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को तत्काल राहत मिली है, जबकि ऊर्जा आयात और टैरिफ बाधाओं में संतुलन बनाए रखने की शर्तें भी जुड़ी हैं।
विश्लेषकों के अनुसार यह निर्णय ऐसे समय आया है जब भारत ने यूरोपीय संघ के साथ बहुपक्षीय ‘गोल्डन डील’ को अंतिम रूप दिया है, BRICS की अध्यक्षता संभाली है और QUAD मंच पर अमेरिका के साथ रणनीतिक सहयोग को नई दिशा दी है। इन सब घटनाओं ने अमेरिका को यह स्वीकार करने पर मजबूर किया कि भारत अब केवल एक उभरता बाजार नहीं, बल्कि एक अनिवार्य रणनीतिक साझेदार है।
भारत-EU डील और अमेरिका पर दबाव:
भारत और यूरोपीय संघ के समझौते से भारत को टेक्सटाइल्स, फार्मा, डिजिटल सेवाओं और ग्रीन टेक्नॉलजी में व्यापक बाजार पहुंच मिली। इसके बदले यूरोप को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार और इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश का अवसर मिला। यह डील अमेरिका के लिए स्पष्ट संदेश थी कि भारत के पास विकल्प मौजूद हैं।
कूटनीतिक मजबूती और BRICS की भूमिका:
भारत की BRICS अध्यक्षता और वैश्विक मंचों पर सक्रियता ने उसकी रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूती दी। रूस से तेल आयात और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत ने संतुलित नीति अपनाई, जिससे अमेरिका पर भी दबाव बना कि भारत के सहयोग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
QUAD और इंडो-पैसिफिक रणनीति:
भारत का QUAD मंच में केंद्रीय स्थान और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में उसकी भूमिका अमेरिका के लिए अहम है। ट्रंप प्रशासन जानता था कि अगर भारत व्यापारिक असंतोष से ठंडा रुख अपनाता, तो अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति कमजोर पड़ सकती थी।
आर्थिक और व्यापारिक प्रभाव:
टैरिफ कट से जेवरात, टेक्सटाइल्स और फार्मा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिली, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि अमेरिकी कृषि और ऊर्जा उत्पादों पर शून्य टैरिफ घरेलू किसानों और MSME पर दबाव बढ़ा सकते हैं। सरकार को सब्सिडी सुधार, निर्यात प्रोत्साहन और कौशल विकास पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।
सौदेबाजी की क्षमता:
विश्लेषकों के अनुसार यह निर्णय भारत की सौदेबाजी क्षमता और रणनीतिक संतुलन का प्रमाण है। भारत ने न तो रूस से संबंध तोड़े, न ही यूरोप और BRICS में अपनी स्वतंत्र भूमिका छोड़ी, बल्कि बहुपक्षीय मंचों का इस्तेमाल कर अमेरिका को यह दिखाया कि सहयोग ही व्यावहारिक रास्ता है।
निष्कर्ष:
ट्रंप का टैरिफ कट भारत की कूटनीतिक और आर्थिक जीत है। यह जीत टकराव से नहीं, बल्कि संतुलन और रणनीतिक स्वायत्तता के माध्यम से हासिल हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि यह संतुलन बना रहा, तो भारत वैश्विक नेतृत्व में नई ऊंचाइयों को छू सकता है।