Wednesday, February 4

Google का नया AI AlphaGenome पढ़ेगा DNA, बताएगा बीमारी की असली वजह

नई दिल्ली: Google ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए AI मॉडल AlphaGenome पेश किया है। यह मॉडल DNA में होने वाले बदलावों को समझकर बता सकता है कि उसका हमारे शरीर पर क्या असर होगा। आसान शब्दों में कहें तो यह मॉडल DNA को ऐसे पढ़ता है जैसे कोई डॉक्टर MRI, CT स्कैन और ब्लड रिपोर्ट मिलाकर बीमारी का अनुमान लगाता है।

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DNA और इसका महत्व:
हमारे शरीर की हर कोशिका में एक किताब होती है, जिसे जीनोम (Genome) कहते हैं। इसमें हमारी शारीरिक विशेषताएं और बीमारियों का खतरा लिखा होता है। DNA के किसी एक अक्षर में छोटा-सा बदलाव भी गंभीर बीमारी की वजह बन सकता है। अब तक वैज्ञानिकों के लिए यह समझना चुनौतीपूर्ण था कि बदलाव का शरीर पर क्या असर पड़ेगा। AlphaGenome इसे संभव बनाता है।

कितना पावरफुल है यह AI:
AlphaGenome एक बार में 10 लाख DNA पढ़ सकता है। यह पता लगा सकता है कि कौन सा जीन कहां शुरू और खत्म होता है, कितना RNA बनेगा, कौन सा हिस्सा एक्टिव रहेगा और कौन सा प्रोटीन से जुड़ेगा। पहले के AI मॉडल या तो छोटे हिस्से को गहराई से देखते थे या बड़े हिस्से को मोटे तौर पर समझ पाते थे, लेकिन AlphaGenome दोनों काम एक साथ करता है।

बीमारी समझने में मदद:
मान लीजिए DNA में एक अक्षर बदल गया। AlphaGenome सेकंडों में स्कोर कर बता सकता है कि यह बदलाव कितना खतरनाक है और किसी जीन को गलत तरीके से एक्टिव कर सकता है या नहीं। उदाहरण के तौर पर, ब्लड कैंसर T-ALL में AlphaGenome ने सही-सही पहचान की कि DNA के बदलाव TAL1 जीन को गलत तरीके से चालू कर रहे हैं, जो कैंसर की असली वजह थी।

सिर्फ बीमारी ही नहीं, और भी काम:
AlphaGenome का इस्तेमाल दुर्लभ बीमारियों और सिंथेटिक बायोलॉजी में भी किया जा सकता है। यह पता लगाने में मदद करेगा कि DNA का कौन सा हिस्सा सबसे जरूरी है और कौन सा सिर्फ सपोर्ट करता है।

कौन इस्तेमाल कर सकता है:
अभी आम लोग इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। Google ने साफ किया है कि यह मॉडल रिसर्च के लिए है, इलाज या पर्सनल जीन टेस्ट के लिए नहीं। यह डॉक्टर की जगह नहीं लेगा, बल्कि वैज्ञानिकों को बेहतर रिसर्च में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि AlphaGenome जीनोम रिसर्च में एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है।

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