
जयपुर: राजस्थान में शिक्षा विभाग से जुड़े एक कथित आदेश को लेकर प्रदेशभर में हलचल मची हुई है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने विधानसभा में इस मामले पर तंज कसते हुए शिक्षा मंत्री मदन दिलावर से स्पष्टीकरण मांगा। डोटासरा ने सवाल उठाया कि क्या अब सरकारी स्कूलों के मास्टर केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें नौ दिवसीय महायज्ञ और रामकथा जैसे धार्मिक आयोजनों की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
मंगलवार को विधानसभा में डोटासरा ने कहा कि शिक्षक शिक्षा के बजाय धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल किए जाएं, तो यह न सिर्फ शिक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ है, बल्कि सरकारी शिक्षकों के कर्तव्यों के दायरे का भी उल्लंघन है। उनके इस बयान के बाद सदन के बाहर भी यह मामला चर्चा का केंद्र बन गया।
शिक्षक संगठनों और आमजन के बीच इस कथित आदेश को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक यह जानने में असमर्थ हैं कि यदि ऐसा आदेश वास्तव में है, तो इसकी औपचारिक सूचना कहां दी गई। वहीं, कुछ शिक्षक संगठन इसे शिक्षा प्रणाली पर दबाव डालने वाला कदम बता रहे हैं।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि आदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण यह गलत तरीके से फैल रही है और जल्द ही विभाग इसकी सटीक व्याख्या जारी करेगा।
इसके अलावा, शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर भी इस संदर्भ में कोई स्पष्ट आदेश नहीं मिला है, जिससे सवाल और बढ़ गए हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शिक्षा मंत्री मदन दिलावर इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण देंगे और कथित आदेश की वास्तविकता क्या है।