
अलवर। राजस्थान के अलवर ने राष्ट्रीय स्तर पर एक नई मिसाल कायम की है। जिले ने देश का पहला ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जहां 10 गांवों के सभी पात्र ग्रामीणों को शत-प्रतिशत बीमा सुरक्षा प्रदान की गई है। मंगलवार को नौ गांवों को औपचारिक रूप से पूर्ण बीमित घोषित किया गया, जबकि एक गांव देसूला को पहले ही पूर्ण बीमित ग्राम का दर्जा मिल चुका था।
जमीनी स्तर पर साकार हुई राष्ट्रीय परिकल्पना
यह उपलब्धि भारत सरकार और भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) द्वारा संचालित ‘सबको बीमा अभियान-2047’ के अंतर्गत हासिल की गई। इस पहल का उद्देश्य ‘सुरक्षित भारत–बीमित भारत’ की परिकल्पना को जमीनी स्तर पर लागू करना है। अलवर जिले ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाते हुए देश में एक नई मिसाल कायम की है।
9 गांवों के 1,367 लोगों को मिला सुरक्षा कवच
मंगलवार को जिले के नौ गांवों में कुल 4,861 निवासियों में से 10 वर्ष से अधिक आयु के 1,367 ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका अब तक बीमा नहीं था। इन सभी को बीमा के दायरे में लाकर पूरे गांवों को शत-प्रतिशत बीमित बनाया गया।
पूर्ण बीमित गांवों में शामिल हैं:
भुल्ला का बास
बिचपुरी
पालानखेड़ा
अंतापाड़ा
हनुमंता
कल्याणपुरा
मोरोड़खुर्द
कोड़ालका
लालपुर
देसूला (पूर्व में पूर्ण बीमित)
881 परिवारों को आधार मानकर सामूहिक बीमा भी कराया गया।
दानदाताओं के सहयोग से बिना आर्थिक बोझ बीमा
सभी बीमा पॉलिसियों का प्रीमियम दानदाताओं द्वारा वहन किया गया। प्राणधारिण ट्रस्ट की श्रीमती सहेली मजूमदार ने अग्रसर होकर यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड में ग्रामीणों का बीमा प्रीमियम जमा कराया। इस पहल से वयस्क नागरिकों को बिना किसी आर्थिक बाधा के सुरक्षा कवच उपलब्ध हो सका।
राष्ट्रीय मिसाल: सुरक्षित भारत–बीमित भारत की दिशा में अलवर अग्रणी
अलवर जिले की यह उपलब्धि न केवल स्थानीय लोगों के लिए लाभकारी है, बल्कि पूरे देश के लिए बीमा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा कवच का मॉडल भी प्रस्तुत करती है।
डॉ. संजीव कुमार दास, संयुक्त निदेशक, राज्य बीमा एवं जीपीएफ विभाग, ने कहा कि यह पहल सुरक्षित भारत–बीमित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना को जमीनी स्तर पर साकार करने की दिशा में अहम कदम है।