Wednesday, February 4

IAS टॉपर Tina Dabi के रहते भी रेगिस्तानी जिलों में सूखती शिक्षा की जड़ें: 5 साल में 30.9% बच्चे छोड़ चुके स्कूल जैसलमेर और बाड़मेर में बढ़ा ड्रॉपआउट, सिर्फ गरीबी नहीं बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी भी वजह

जयपुर। राजस्थान के रेगिस्तानी जिले जैसलमेर और बाड़मेर में शिक्षा का संकट गहरा गया है। संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 5 सालों में यहां 30.9% तक छात्र स्कूल छोड़ चुके हैं। यह स्थिति इसलिए और चौंकाने वाली है क्योंकि यूपीएससी टॉपर और चर्चित आईएएस टीना डाबी इन जिलों की कमान संभाल चुकी हैं। वह वर्तमान में बाड़मेर की कलेक्टर हैं और इससे पहले जैसलमेर में कार्यरत रही हैं।

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प्राइमरी से आगे नहीं बढ़ पा रहे कदम

लोकसभा में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा पेश आंकड़ों के अनुसार, प्राइमरी और सेकेंडरी स्तर के बीच 26.4% छात्र ने स्कूल छोड़ दिया है।

  • जैसलमेर में कुल ड्रॉपआउट दर 30.9%, सेकेंडरी स्तर पर 15.3%

  • बाड़मेर में कुल दर 21.3%

इस आंकड़े से स्पष्ट है कि छात्र प्राइमरी से मिडिल और सेकेंडरी शिक्षा की ओर बढ़ते समय सबसे अधिक पढ़ाई छोड़ रहे हैं।

सिर्फ गरीबी नहीं, सुविधाओं की कमी भी जिम्मेदार

बाड़मेर के सांसद ने बताया कि समस्या सिर्फ गरीबी नहीं है। असली चुनौती खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की कमी है। कई स्कूलों में:

  • अपनी इमारत नहीं

  • शौचालय और पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं

  • लंबी दूरी और ट्रांसपोर्ट की सुविधा का अभाव

इससे छात्र प्राइमरी से आगे बढ़ते समय पढ़ाई छोड़ देते हैं।

उजड़ते भविष्य की चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि उच्च स्तर पर ड्रॉपआउट दर तेजी से बढ़ रही है और सीमावर्ती रेगिस्तानी जिलों में शिक्षा का सपोर्ट सिस्टम चरमरा गया है। अगर समय रहते बुनियादी ढांचा और सुविधाएं नहीं सुधारी गईं, तो इन बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब सकता है।

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