
नागौर। राजस्थान के नागौर जिले में 10 टन विस्फोटक (बारूद/अमोनियम नाइट्रेट) बरामद होने के मामले में SIT की जांच ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस अवैध विस्फोटक सप्लाई नेटवर्क में एक नर्सिंगकर्मी भी शामिल था, जो अस्पताल में नौकरी की आड़ लेकर पिछले दो वर्षों से विस्फोटक सामग्री की अवैध सप्लाई कर रहा था। इस मामले में SIT ने चार बड़े सप्लायरों को गिरफ्तार कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है।
इस खुलासे के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है।
हरसौर में मिला था 10 टन विस्फोटक, SIT की कार्रवाई तेज
बताया गया कि 24 जनवरी को नागौर के हरसौर क्षेत्र में 10 टन विस्फोटक बरामद किया गया था। इस मामले को गंभीर मानते हुए SIT को जांच सौंपी गई, जिसके बाद लगातार पूछताछ और दस्तावेजी जांच के आधार पर अवैध नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।
‘सफेद कोट’ में चल रहा था मौत का कारोबार
SIT जांच में सबसे चौंकाने वाला नाम देवराज मेड़तिया का सामने आया है। पुलिस के अनुसार देवराज ने करीब दो साल पहले अपना मैगजीन लाइसेंस सरेंडर कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद वह अवैध रूप से विस्फोटक की सप्लाई कर रहा था।
देवराज वर्तमान में कुचेरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में संविदा पर नर्सिंगकर्मी के रूप में कार्यरत था। पुलिस का कहना है कि सेवा और इलाज की आड़ में वह ‘मौत का सामान’ बेचने का नेटवर्क चला रहा था।
लाइसेंसधारकों ने रिकॉर्ड में की हेराफेरी
पुलिस ने इस मामले में जिन अन्य तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें—
भरत कुमार
महेंद्र पाल सिंह (नागौर)
बंसीलाल बंजारा (चित्तौड़गढ़)
शामिल हैं। जांच में सामने आया कि इन तीनों के पास विस्फोटक रखने का वैध लाइसेंस था, लेकिन वे रिकॉर्ड में हेराफेरी कर विस्फोटक सामग्री को अवैध रूप से बेच रहे थे।
पुलिस के अनुसार, यह विस्फोटक सामग्री अपराधियों तक भी पहुंचाई जा रही थी, जिससे कानून व्यवस्था को गंभीर खतरा पैदा हो रहा था।
सरकारी दर से ज्यादा वसूली कर कमाते थे मुनाफा
SIT ने खुलासा किया कि आरोपी 50 किलो के कट्टे पर सरकारी दर से 10 रुपये प्रति किलो अतिरिक्त मुनाफा कमा रहे थे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह नेटवर्क करोड़ों के अवैध कारोबार से जुड़ा हुआ हो सकता है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी अमोनियम नाइट्रेट जैसी सामग्री को ऊंचे दामों पर बेचकर भारी लाभ उठा रहे थे।
3000 टन क्षमता का लाइसेंस, फिर भी अवैध खेल
सबसे हैरानी की बात यह सामने आई कि आरोपी बंसीलाल बंजारा के पास 3000 टन क्षमता का विशाल लाइसेंस था। पुलिस का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा के लाइसेंस की आड़ में अवैध सप्लाई को आसानी से छिपाया जा रहा था।
नियमों में बदलाव की तैयारी, पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेजी
मामले की गंभीरता को देखते हुए नागौर एसपी ने पुलिस मुख्यालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजी है। रिपोर्ट में विस्फोटक अधिनियम के नियमों में सुधार और लाइसेंसधारकों की सख्त निगरानी की सिफारिश की गई है।
पुलिस का मानना है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा है और इसके तार अन्य जिलों तक भी फैल सकते हैं। अब SIT पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने के लिए जांच को और तेज कर रही है।
सुरक्षा एजेंसियों में चिंता, जांच जारी
10 टन विस्फोटक की बरामदगी और अवैध सप्लाई की पुष्टि के बाद यह मामला राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विस्फोटक सामग्री किन लोगों तक पहुंचाई जा रही थी और इसके पीछे कौन-कौन बड़े चेहरे शामिल हैं।