Wednesday, February 4

पटना हाई कोर्ट से संतोष कुमार सुमन को बड़ी राहत, 8 साल पुराना आपराधिक मामला रद्द

पटना। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बेटे और बिहार सरकार में लघु जल संसाधन मंत्री संतोष कुमार सुमन को पटना हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पटना हाई कोर्ट ने मंगलवार को उनके खिलाफ दर्ज आठ साल पुराने आपराधिक मामले को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने सुनाया।

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हाई कोर्ट ने बोधगया थाना में दर्ज एफआईआर के आधार पर चल रही पूरी आपराधिक कार्रवाई को समाप्त करते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामला आगे बढ़ाना उचित नहीं है।

क्या था संतोष कुमार सुमन पर आरोप?

जानकारी के अनुसार संतोष कुमार सुमन के खिलाफ अप्रैल 2017 में बोधगया थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस एफआईआर में उन पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोप था कि उन्होंने—

  • गैरकानूनी भीड़ एकत्र की

  • सड़क जाम कराया

  • सार्वजनिक उपद्रव किया

  • लोगों पर हमला किया

  • सरकारी अधिकारियों को उनके कर्तव्य पालन से रोका

एफआईआर में संतोष कुमार सुमन समेत अन्य लोगों पर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था, जो पिछले आठ वर्षों से अदालत में विचाराधीन था।

सुमन की ओर से कोर्ट में क्या दलील दी गई?

संतोष कुमार सुमन की ओर से अधिवक्ता दीनू कुमार और वरदान मंगलम ने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि एफआईआर को पढ़ने मात्र से ही यह स्पष्ट हो जाता है कि इसमें किसी प्रकार का आपराधिक अपराध बनता ही नहीं है। उन्होंने दलील दी कि सुमन उस समय जनता को केवल राजनीतिक भाषण दे रहे थे और इसे अपराध का रूप देकर दुर्भावनापूर्ण तरीके से उन्हें परेशान किया गया।

वकीलों ने अदालत में यह भी कहा कि एफआईआर में दर्ज की गई धाराएं एक निर्दोष नागरिक को परेशान करने के उद्देश्य से लगाई गई हैं और यह बदनीयत से दर्ज किया गया मामला है।

सरकार ने किया विरोध

इस मामले में राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील झारखंडी उपाध्याय ने एफआईआर रद्द करने की याचिका का विरोध किया और अदालत से याचिका खारिज करने की मांग की।

हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने का आदेश दिया

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संदीप कुमार की पीठ ने संतोष कुमार सुमन के वकीलों की दलीलों को मजबूत मानते हुए बोधगया थाना में दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया और इसके आधार पर चल रही पूरी आपराधिक कार्रवाई समाप्त कर दी।

राजनीतिक हलकों में चर्चा

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इस फैसले से संतोष कुमार सुमन को बड़ी कानूनी राहत मिली है और उनका नाम लंबे समय से चल रहे विवाद से बाहर आ गया है।

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