
नोएडा। यमुना नदी में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि नोएडा क्षेत्र से बिना ट्रीट किए सीवर का पानी यमुना नदी में डाला जा रहा है। इस मामले में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है।
यह रिपोर्ट विशेष रूप से कोडली स्टॉर्म वॉटर ड्रेन से यमुना में पहुंच रहे दूषित पानी को लेकर तैयार की गई है। CPCB के निष्कर्षों ने नोएडा अथॉरिटी के उस दावे पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसमें कहा गया था कि शहर में 100 प्रतिशत सीवेज ट्रीट किया जा रहा है।
नोएडा अथॉरिटी का दावा: क्षमता से अधिक STP मौजूद
नोएडा अथॉरिटी ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिपोर्ट में बताया कि शहर में कुल 411 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) उपलब्ध हैं, जबकि नोएडा में केवल 240 एमएलडी सीवेज उत्पन्न होता है। अथॉरिटी का दावा है कि शहर का सारा सीवेज ट्रीट किया जा रहा है और STP से निकलने वाले ट्रीटेड पानी को उद्योगों को बेचा भी जा रहा है।
अथॉरिटी के मुताबिक शहर की 30 ड्रेनों में से 6 ड्रेन सूखी हैं और 24 ड्रेनों की जियो-टैगिंग की जा चुकी है। कई ड्रेनों को STP और इन-सीटू वेटलैंड से जोड़ने का काम भी किया गया है। इसके साथ ही ड्रेनों को ट्रैप करने के लिए चरणबद्ध योजना पर कार्य चल रहा है।
CPCB की रिपोर्ट: 8 में से केवल 3 STP मानकों पर खरे
CPCB की रिपोर्ट में सामने आया कि दिसंबर 2025 में नोएडा के 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 3 इन-सीटू वेटलैंड से सैंपल लिए गए थे। जांच के दौरान 8 में से केवल 3 STP ही प्रदूषण मानकों पर खरे उतरे, जबकि बाकी STP एक या अधिक मानकों का पालन करने में विफल रहे।
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश STP BOD (बायोकैमिकल ऑक्सीजन डिमांड) जैसे अहम मानक पर फेल पाए गए। BOD जल प्रदूषण मापने का प्रमुख पैमाना माना जाता है। अधिक BOD का अर्थ है पानी में ऑक्सीजन की कमी और प्रदूषण की अधिकता, जिससे नदी में रहने वाले जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है।
यमुना में मिलने से पहले ड्रेन के पानी में BOD बेहद अधिक
CPCB ने कोर्ट को यह भी बताया कि सबसे चिंताजनक स्थिति तब सामने आई जब यमुना में मिलने से ठीक पहले नोएडा ड्रेन के पानी में BOD की मात्रा काफी ज्यादा पाई गई। इससे संकेत मिलता है कि ड्रेन में कई जगहों से बिना ट्रीट किया गया या अधूरा ट्रीट गंदा पानी छोड़ा जा रहा है, जो सीधे यमुना नदी को प्रदूषित कर रहा है।
जांच के दौरान कई सीवर आउटलेट पर भी प्रदूषण स्तर अत्यधिक मिला, जिससे अवैध या अनियंत्रित डिस्चार्ज की आशंका मजबूत हुई है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हालात ज्यादा खराब
रिपोर्ट में ग्रेटर नोएडा वेस्ट की स्थिति को भी गंभीर बताया गया है। यहां की कई ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों से निकलने वाला सीवेज बिना ट्रीटमेंट के सीधे नालों में बहाया जा रहा है, जिससे यह गंदा पानी आगे चलकर हिंडन नदी में पहुंच रहा है।
आरोप है कि कई सोसायटियों में STP मौजूद होने के बावजूद उनका संचालन नहीं किया जा रहा, जिससे गंदा पानी बेसमेंट और नालों में जमा हो रहा है। इससे आसपास के इलाके में बदबू और गंदगी फैल रही है।
सोसायटियों में STP सिर्फ कागजों में
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की विक्ट्री वन सेंट्रल सोसायटी में करीब 400 परिवार रहते हैं। सोसायटी के निवासियों का आरोप है कि STP लगाने का दावा केवल कागजों तक सीमित है। वहीं सेक्टर-4 स्थित एम्स ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में करीब 700 परिवार रहते हैं, जहां STP की व्यवस्था नहीं होने के कारण बेसमेंट में लगातार गंदा पानी भरा रहता है।
हिंडन नदी का पानी नहाने और पीने लायक नहीं
हिंडन नदी की स्थिति भी लगातार बिगड़ती जा रही है। रिपोर्ट में बताया गया कि हिंडन नदी में फीकल कोलिफॉर्म की मात्रा 3 लाख 30 हजार MPN प्रति 100 ML तक पहुंच गई है, जबकि नदियों में यह स्तर 500 तक होना चाहिए। पीने योग्य पानी में यह सीमा केवल 50 निर्धारित है।
सुप्रीम कोर्ट में आज अहम सुनवाई
यमुना और हिंडन नदी को प्रदूषित करने के इस गंभीर मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई होनी है। वहीं इसी मुद्दे से जुड़े एक अन्य मामले में गुरुवार को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में भी सुनवाई प्रस्तावित है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि यमुना में गिर रहे दूषित पानी पर रोक लगाने के लिए नोएडा अथॉरिटी और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ क्या सख्त कदम उठाए जाएंगे।