
भारत में इस साल चावल का रिकार्ड उत्पादन होने के बीच अमेरिका से भारतीय निर्यातकों के लिए खुशखबरी आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत से आने वाले सामानों पर रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 50% से 18% कर दिया है। इस कदम से भारतीय चावल निर्यातक उत्साहित हैं और उनका कहना है कि अब वे थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों के निर्यातकों के साथ बेहतर प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
भारतीय चावल निर्यातक महासंघ (IREF) के अध्यक्ष प्रेम गर्ग ने बताया कि यह समझौता भारत के चावल निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। अब अमेरिका में भारत के चावलों पर लगने वाला शुल्क लगभग उतना ही रहेगा जितना थाईलैंड और पाकिस्तान के चावलों पर लागू है। इससे पहले भारतीय चावलों पर 50% ड्यूटी लगती थी, जबकि अन्य देशों पर यह करीब 19% थी।
प्रेम गर्ग ने कहा, “यह खबर भारतीय निर्यातकों के लिए बहुत सकारात्मक है, खासकर तब जब भारत रिकॉर्ड 149 मिलियन टन चावल उत्पादन के युग में प्रवेश कर रहा है। हमारी उपलब्धता अच्छी है और घरेलू बाजार भी मजबूत है। भारतीय कृषि उत्पाद हमेशा से वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण रहे हैं।”
महासंघ ने यह भी बताया कि अमेरिकी बाजार में भारतीय चावल का निर्यात तब भी बढ़ा था, जब उस पर शुल्क बढ़ाकर 50% कर दिया गया था। इससे स्पष्ट होता है कि अमेरिकी खरीदार और उपभोक्ता भारतीय चावल को पसंद करते हैं। शुल्क में समानता आने के बाद निर्यात की मात्रा बढ़ने के साथ ही कीमतों में भी सुधार होने की संभावना है।
IREF का मानना है कि इस बदलाव से अमेरिका में बासमती और गैर-बासमती दोनों तरह के चावलों की बिक्री बढ़ेगी। इससे भारत अपनी बाजार हिस्सेदारी को मजबूत कर सकेगा और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में और बेहतर स्थिति में आएगा।