
बाराबंकी/दिल्ली: बाराबंकी जिले के बीबीपुर गांव निवासी डॉ. सुदेश कुमार वर्मा को भारत सरकार की प्रतिष्ठित टैगोर नेशनल फेलोशिप (Tagore National Fellowship for Cultural Research) के लिए चयनित किया गया है। वे अगले दो वर्षों तक इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली से संबद्ध होकर “भारत में रामकथा की कलात्मक अभिव्यक्ति” विषय पर गहन शोध करेंगे।
इस वर्ष देश भर से हजारों आवेदनों में से मात्र 35 शोधार्थियों का चयन हुआ, जिसमें डॉ. सुदेश कुमार का नाम भी शामिल है। उनके चयन को न केवल व्यक्तिगत सफलता बल्कि पूरे बाराबंकी जिले के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है।
डॉ. सुदेश कुमार का शोध भारतीय चित्रकला, मूर्तिकला, लोककला और नाट्य परंपराओं में रामकथा की अभिव्यक्ति और उसकी ऐतिहासिक निरंतरता को उजागर करेगा। यह अध्ययन भारतीय कला-संस्कृति की समृद्ध परंपरा को नई दृष्टि प्रदान करने में सहायक होगा।
डॉ. सुदेश कुमार ने अपने शैक्षणिक सफर की शुरुआत अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद से की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। वर्तमान में वे दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर (गेस्ट) के रूप में कार्यरत हैं और भारतीय कला-संस्कृति से जुड़े विषयों पर निरंतर शोध एवं लेखन कर रहे हैं।
बीबीपुर गांव और बाराबंकी के शिक्षाविदों में इस उपलब्धि को लेकर खुशी का माहौल है। संस्कृति मंत्रालय की राष्ट्रीय चयन समिति ने उनके शोध प्रस्ताव की अकादमिक महत्ता को देखते हुए इसे मंजूरी दी।