
वॉशिंगटन: अमेरिका ने दुर्लभ खनिजों और क्रिटिकल मिनरल्स पर Pax Silica नामक एक महागठबंधन बनाने की पहल की है। इसकी पहली बैठक 4 फरवरी को वॉशिंगटन में आयोजित की जाएगी। इस सम्मेलन में भारत, यूरोपीय यूनियन, UK, जापान, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड समेत करीब 20 देश शामिल होंगे।
इस गठबंधन का उद्देश्य चीन के वर्चस्व को कम करना और सेमीकंडक्टर, AI, इलेक्ट्रिक वाहनों और स्वच्छ ऊर्जा उपकरणों के लिए जरूरी मिनरल्स की सप्लाई चेन को सुरक्षित करना है। भारत के विदेश मंत्री जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो द्वारा बुलाई गई ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिनिस्टीरियल’ में भाग लेंगे।
अमेरिका के प्रयास का उद्देश्य है विश्वसनीय सहयोगियों के साथ एक नया इको-सिस्टम बनाना, जिसमें लिथियम, कोबाल्ट और अन्य दुर्लभ खनिजों की माइनिंग, प्रोसेसिंग और सप्लाई चेन शामिल होगी। इसके तहत सेमीकंडक्टर चिप निर्माण और डिज़ाइन, डेटा सेंटर, कंप्यूटिंग पावर और AI हार्डवेयर के लिए साझा नेटवर्क बनाने पर भी चर्चा होगी।
ऑस्ट्रेलिया ने पहले ही 1.2 बिलियन ऑस्ट्रेलियन डॉलर का रणनीतिक रिजर्व तैयार करने का ऐलान किया है, ताकि चीन द्वारा सप्लाई चेन में रुकावट आए, तो उनके पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रहे। ऑस्ट्रेलिया और जापान ने भी इसी रणनीति को अपनाया है।
इस पहल को अमेरिका के लिए रणनीतिक सुरक्षा और तकनीकी नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यूरोपीय संघ के सूत्रों के अनुसार, सम्मेलन सफल रहा तो इसमें एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए मील का पत्थर माना जाएगा।