
उत्तर प्रदेश में सहायक शिक्षक भर्ती को लेकर बड़ा घोटाला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्यभर के सभी असिस्टेंट टीचर्स के दस्तावेज फिर से जांचने का आदेश दिया है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को यह प्रक्रिया छह महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है।
क्या हुआ मामला?
मामला अगस्त 2025 का है, जब देवरिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने असिस्टेंट टीचर गरिमा सिंह की नियुक्ति रद्द कर दी थी। अधिकारी का आरोप था कि गरिमा के शैक्षणिक प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र फर्जी हैं। गरिमा ने बर्खास्तगी को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जांच में सामने आया कि गरिमा के दस्तावेज किसी और व्यक्ति के हैं। हाईकोर्ट ने इसे भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार का हिस्सा माना और कहा कि फर्जी दस्तावेजों पर नियुक्ति पाने वाले अध्यापक वर्षों तक सेवा में बने रहते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य प्रभावित होता है।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने राज्य के सभी असिस्टेंट टीचर्स के दस्तावेजों की व्यापक जांच का आदेश दिया। जिन शिक्षकों की भर्ती फर्जी पाई जाएगी, उनकी नियुक्ति रद्द कर दी जाएगी और उन्हें वेतन की वसूली भी करनी होगी। साथ ही, उन अधिकारियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने का निर्देश भी दिया गया है, जिनकी लापरवाही या मिलीभगत के कारण यह फर्जीवाड़ा संभव हुआ।
हाईकोर्ट ने साफ कहा कि यह कार्रवाई छात्रों के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की सुरक्षा के लिए जरूरी है