
नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश किया। लगातार नौवां बजट पेश करने वाली सीतारमण ने इस बार बड़े सुधारों की बजाय निरंतरता और स्थिरता पर जोर दिया। उन्होंने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ सही दिशा में है, लेकिन किसी बड़े सुधार की घोषणा नहीं की गई।
विश्लेषकों का कहना है कि बजट को सबसे कम रोमांचक (exciting) कहा जा सकता है। उदाहरण के तौर पर, वित्त मंत्री यूरिया पर दी जा रही भारी सब्सिडी में कमी कर सकती थीं, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में 8% की मजबूत ग्रोथ रही है, और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इसे छेड़ने की आवश्यकता नहीं मानी गई।
बाजार पर असर:
बजट पेश होने के बाद निफ्टी में 2% से अधिक गिरावट आई। इसका मुख्य कारण फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर स्टॉक्स ट्रेडिंग टैक्स (STT) में भारी बढ़ोतरी है। सरकार चाहती है कि छोटे निवेशक वायदा बाजार से दूर रहें। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स बढ़ाने से केवल ट्रेडिंग कॉस्ट बढ़ती है और छोटे निवेशकों को नुकसान होता है।
फिस्कल डेफिसिट और केपेक्स:
इस बजट में फिस्कल कंसॉलिडेशन का सिलसिला जारी रहा। वित्त वर्ष 2026 में राजकोषीय घाटा GDP का 4.41% और अगले साल 4.3% रहने का अनुमान है। केंद्र के debt-GDP रेश्यो 56.1% से घटकर 55.6% होने का अनुमान है।
सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए केपेक्स 12.2 लाख करोड़ रुपये निर्धारित किया है, जो इस क्षेत्र में निवेश और विकास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।
यूरिया सब्सिडी और सुधार की जरूरत:
यूरिया पर अधिक सब्सिडी के कारण किसानों की खपत बढ़ती है और भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे यूरिया का डायवर्जन और अंतरराष्ट्रीय स्मगलिंग का खतरा रहता है। कांग्रेस के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने इसी रास्ते का प्रयोग करके डीजल सब्सिडी धीरे-धीरे समाप्त करने में सफलता पाई थी।
GDP ग्रोथ और रक्षा पर खर्च:
बजट में अगले साल 10% नॉमिनल GDP ग्रोथ का अनुमान लगाया गया है, जिसमें रियल ग्रोथ 7% और महंगाई 3% शामिल है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच रक्षा पर खर्च 15.3% बढ़ाया गया है, ताकि भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत किया जा सके।
AI और टेक्नॉलजी निवेश:
वित्त मंत्री ने भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए डेटा सेंटर में विदेशी निवेश पर 2047 तक टैक्स छूट की घोषणा की। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़ॉन जैसी कंपनियां पहले ही बड़े निवेश कर चुकी हैं।
शेयरधारकों और टैक्स सुधार:
कंपनियां अब डिविडेंड के बजाय बायबैक का इस्तेमाल कर रही हैं। बजट में बायबैक पर कैपिटल गेन टैक्स, लॉन्ग टर्म निवेश पर 12.54% और शॉर्ट टर्म निवेश पर 20% का टैक्स लगाने का ऐलान किया गया। साथ ही, टैक्स आर्बिट्राज रोकने के लिए कॉरपोरेट प्रोमोटर्स पर 22% और नॉन-कॉरपोरेट पर 30% टैक्स लागू होगा।
सरकारी संपत्तियों की बिक्री:
वित्त मंत्री ने मिनिमम ऑल्टरनेट टैक्स (MAT) को 15% से घटाकर 14% किया और कैरी फॉरवर्ड प्राविज़न समाप्त किया। अगले वित्त वर्ष में सरकारी संपत्तियों की बिक्री से 80,000 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष में इससे 33,837 करोड़ रुपये आए।