
लखनऊ में रविवार, 1 फरवरी को जावेद अख्तर ने कॉमरेड शंकर दयाल तिवारी की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में धर्म, राजनीति और समाज पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि आस्तिक के पास दो विकल्प हैं—धर्म और राष्ट्रवाद, जबकि नास्तिक के लिए धर्म विकल्प नहीं होता, उसे राष्ट्र ही प्राथमिकता देगा।
जावेद अख्तर ने अपने निजी जीवन की बातें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके जन्म के समय घर में कम्युनिस्ट विचारधारा थी और उनके पिता के दोस्तों ने उन्हें स्टालिन की तस्वीर दिखाई। अपनी पहली पत्नी हनी ईरानी के बारे में उन्होंने कहा कि अगर उनसे तीन सबसे अच्छे दोस्तों के नाम पूछे जाएं तो पहला नाम हमेशा हनी का ही आएगा।
धर्म और नैतिकता पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म अच्छे और बुरे कर्म की शिक्षा देता है, लेकिन लालच और डर दिखाकर नैतिकता नहीं सिखा सकता। शिक्षा पर उन्होंने चिंता जताई कि बच्चों को केवल वही करना सिखाया जा रहा है जो उन्हें बताया जाए, जिससे उनकी सोचने की क्षमता सीमित हो रही है।
सिनेमा और समाज पर अपनी राय व्यक्त करते हुए जावेद अख्तर ने कहा कि आज मल्टीप्लेक्स में दर्शक मनोरंजन के लिए जाते हैं और समाज या गरीबों की परेशानियों से उनका संबंध कम हो गया है। इसके चलते फिल्में भी अधिकतर इसी मानसिकता को दर्शाती हैं।
जावेद अख्तर की यह बेबाक टिप्पणी धर्म, राष्ट्रवाद और सामाजिक विचारों पर बहस को नया आयाम दे रही है।