Saturday, January 31

लद्दाख में खून जैसा लाल आसमान: खूबसूरती नहीं, चेतावनी है खतरे की

नई दिल्ली: लद्दाख के हानले क्षेत्र में 19 और 20 जनवरी की रातें इस बार सामान्य नहीं रहीं। आसमान में लाल रंग की भव्य लेकिन खतरनाक चमक दिखाई दी, जिसने वहां के निवासियों और वैज्ञानिकों दोनों को हैरान कर दिया। यह लालिमा सूर्य से निकले एक शक्तिशाली एक्सक्लास सौर ज्वाला और उसके परिणामस्वरूप आए सौर विकिरण तूफान का नतीजा थी।

This slideshow requires JavaScript.

वैज्ञानिकों के अनुसार यह पिछले 20 सालों में सबसे तीव्र सौर विकिरण तूफान था। इस तूफान ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे संचार प्रणाली, बिजली ग्रिड, GPS और उपग्रहों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया। भारत के आदित्यएल1 मिशन जैसे उपग्रह वैज्ञानिकों को इन घटनाओं की भविष्यवाणी करने में मदद कर रहे हैं, ताकि संभावित नुकसान को कम किया जा सके।

लद्दाख में यह लाल रोशनी सामान्य ऑरोरा (उत्तरी ध्रुवीय ज्योति) जैसी दिखाई दी। सोशल मीडिया पर इन अद्भुत नजारों की तस्वीरें तेजी से वायरल हुईं और लोगों ने इसेभारत के ऊपर उत्तरी ध्रुवीय ज्योतिके रूप में देखा। हालांकि, इस सुंदरता के पीछे गंभीर खतरे का संकेत छिपा था।

विशेषज्ञों के अनुसार, 18 जनवरी को सूर्य से निकली एक्सक्लास सौर ज्वाला ने अंतरिक्ष में एक कोरोनल मास इजेक्शन (CME) भेजा। यह सुपरहीटेड प्लाज्मा का घना बादल लगभग 1,700 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ा और 25 घंटों के भीतर पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराया। इस टक्कर के कारण जी4-स्तर का भूचुंबकीय तूफान शुरू हुआ। इस तूफान ने ऑक्सीजन परमाणुओं को उत्तेजित कर लाल चमक पैदा की, जिसे हानले से देखा गया।

इसरो के वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसेजैसे सूर्य अपने लगभग 11 साल के चक्र के सबसे सक्रिय चरण के करीब पहुंच रहा है, ऐसी घटनाएं और भी आम हो सकती हैं। उनका कहना है कि यह चेतावनी देती है कि सूर्य की गतिविधियों की निगरानी लगातार जरूरी है।

Leave a Reply