
1 फरवरी 2026 को आने वाले केंद्रीय बजट से पहले, शिक्षा क्षेत्र में छात्रों और माता-पिता की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इस बार कोचिंग संस्थानों पर लागू वस्तु एवं सेवा कर (GST) में राहत देने की मांग उठी है।
नई दिल्ली स्थित कोचिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (CFI) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में केंद्रीय बजट में कोचिंग और सहायक शिक्षा सेवाओं पर GST की दर घटाने या पूरी तरह छूट देने की अपील की है। फेडरेशन का कहना है कि वर्तमान में GST छात्र की फीस में सीधे जोड़ दिया जाता है, जिससे माता-पिता पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है।
CFI ने अपने 28 जनवरी के प्रतिनिधित्व में सुझाव दिया है कि GST की दर को वर्तमान 18 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत किया जाए या इसे पूरी तरह से छूट दी जाए। यदि सरकार इस पर सकारात्मक कदम उठाती है, तो JEE, NEET, SSC, UPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले करोड़ों छात्र और उनके माता-पिता वित्तीय राहत का लाभ उठा सकेंगे।
CFI के उपाध्यक्ष केशव अग्रवाल ने बताया, “JEE, NEET, CA, CUET, CLAT, SSC और UPSC जैसी परीक्षाओं की तैयारी अब कई घरों के लिए अनिवार्य हो गई है। इसलिए कई मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए कोचिंग आवश्यक बन गई है। यदि GST दर कम या सही की जाती है, तो परिवारों का खर्च कम हो सकता है।”
वर्तमान में कोचिंग सेंटर और ऑनलाइन ट्यूशन पर 18 प्रतिशत GST लागू है। इससे छात्र केवल फीस ही नहीं बल्कि अतिरिक्त टैक्स भी भरते हैं। आगामी बजट में यदि GST दर कम होती है या इसे शून्य कर दिया जाता है, तो यह छात्रों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।